जिगिशा घोष के दो हत्यारों को फांसी, एक को उम्रकैद


 

jigisha-ghosh_650x400_41468488382-580x395नई दिल्ली: साल 2009 में दिल्ली के वसंत विहार में हुए जिगीशा हत्याकांड के तीन में से दो दोषियों को मिली मौत की सज़ा और तीसरे दोषी को उम्र गुज़ारनी पड़ेगी जेल की सलाखों के पीछे. दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आने फैसले में माना कि जिगीशा की हत्या रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर की श्रेड़ी में आता है लिहाज़ा 3 में से 2 दोषियों को सुनाई फांसी की सज़ा.

जिगीशा की माँ हर एक दिन बस इसी आस में काट रही हैं की उनकी बेटी के हत्यारों को सज़ा मिले. जिगीशा की हत्या से लेकर आज तक उनकी आँखों से बात बात पर आंसू छलक जाते थे पर आज इनके चेहरे पर एक मुस्कान भी है क्योंकि इनके बेटी के हत्यारों को मिली है मौत की सज़ा.

अदालत से फैसले के बाद जिगीशा की माँ का कहना था कि सब कह रहे थे की दोषियों को उम्र क़ैद होगी पर मैंने सबसे कहा था कि फांसी की सज़ा होगी. जिगीशा अपने माता पिता की इकलौती संतान थी. उसके कत्ल के बाद से ये परिवार टूट चुका था. इस बात का अंदाजा जिगीशा की माँ के इस बयान से लग जाता है.

जिगीशा की माँ सविता घोष के मुताबिक मैं तो जीना ही नहीं चाहती थी ख़ुदकुशी करने वाली थी आखिर किसके लिए जीती. भले ही आज हमारी बेटी हमारे साथ नहीं है लेकिन इस फैसले ने एक सुकून ज़रूर किया है कि बेटी के हत्यारों को मौत की सज़ा मिली है.

7 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साकेत कोर्ट ने 2009 के जिगीशा घोष हत्याकांड में तीनों दोषियों की सज़ा का एलान करते हुए कहा कि इन लोगों को हत्या की धारा में दोषी ठहराया गया है लिहाज़ा “अब अदालत को ये देखना है कि क्या ये मामला रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर की श्रेड़ी में आता है या नहीं. लेकिन जिस तरह से इन लोगों ने जिगीशा का अपहरण किया लूटपाट की और फिर हत्या की वो इनकी सोंची समझी साजिश की ओर इशारा करता है. अदालत ने फैसले में कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को देखते हुए सख्त सन्देश देना जरूरी. और इस मामले में तो निस तरह से कत्ल किया गया वो कोल्ड ब्लडेड मर्डर था लिहाज़ा इनमे से दो आरोपियों रवि कपूर, अमित शुक्ला को मौत की सज़ा और जगजीत मलिक को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई जा रही है.”

अदालत ने जिस दौरान सज़ा का एलान किया उस दौरान मामले की जांच टीम का हिस्सा रहे साउथ दिल्ली के डीसीपी एच एस धालीवाल भी कोर्ट रूम में मौजूद थे फिलहाल धालीवाल अब दूसरे विभाग में कार्यरत हैं लेकिन क्योंकि इस केस से वो खुद भी जुड़े थे लिहाज़ा अदालत पहुंचे थे. अदालत के फैसले के बाद उन्होंने में बताया कि कैसे पुलिस ने उस दौरान अपराधियों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी.

अदालत के फैसले पर दोषीयों के वकील ने कहा कि ये मामला रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर का नहीं था लिहाज़ा इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे. अदालत के इस फैसले से बूढ़े माँ बाप की बेटी तो वापस नहीं लौटेगी पर कम से ये सुकून तो ज़रूर होगा की बेटी के हत्यारे भी फांसी के फंदे पर झूलेंगे उनको उनके कृत्य का अंजाम भुगतना होगा.


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