
लखनऊ। एलडीए में अधिकारियों के खेल भी गजब के हैं ताजा मामला इंजीनियरिंग से जुड़ा हुआ है जहां ग्रीनवुड अपार्टमेंट के चार कैम्पस की एक ही फायर की NOCली गई । इतना ही नहीं इसका निर्माण शुरू हुआ 2016 में और पर NOC ले ली गई 2014 में ही । यह कैसे हो सकता है ? यह एलडीए के अभियंता, फायर विभाग और ग्रीनवुड अपार्टमेंट बनाने वाली कम्पनी एन सी सी ही जानें ।
चलिए बताते हैं इस खेल को विस्तार से यह ग्रीनवुड अपार्टमेंट की फायर की NOC है जिसे अपार्टमेंट बनाने वाली कम्पनी एन सी सी ने वर्ष 2014 में ही ले लिया था | अब सवाल है कि ग्रीनवुड के 4 अपार्टमेंट है जिसमे कुल 8 टावर है यह NOC अपने मे सवालों के घेरे में है क्योकि 4 कैम्पस की एक साथ NOC जारी ही नही की जा सकती कारण सभी अपार्टमेंट का एरिया, व्यवस्था अलग अलग होती है |


दरसल हम आपको यह भी बताते चले कि यह NOC जारी क्यो हुई। ग्रीनवुड एक परियोजना थी जिसे एक ही कैम्पस में बनाया जाना था लेकिन जमीन विवादों में फस गयी, जिसके कारण अलग अलग कैम्पस बनाना पड़ा, लेकिन NOC लेने और देने में एलडीए और फायर विभाग ने सावधानी नही बरती, और बिल्डिंग निर्माण से पहले ली गयी प्री NOC को ही फाइनल NOC दे दिया। यह भी नही देखा कि ग्रीनवुड परियोजना 4 कैम्पस में बनाया गया। यह भी नही देखा कि ग्रीनवुड H ब्लाक में मात्र एक ही गेट लगे है जिसके आधार पर अपार्टमेंट को फायर की NOC तो दूर एलडीए कंप्लीशन सर्टिफिकेट तक जारी नही कर सकता।
यह एलडीए का वह भ्रस्टाचार रूपी बीज है जो एलडीए के पूर्वजो ने बोया है और वर्तमान अधिकारी जिम्मेदारी पूर्वक उन्हें संरक्षण देकर अपनी वफादारी निभा रहे है। जनता के साथ न्याय करने, उन्हें उनका अधिकार देने के बजाय गुमराह कर रहे है। आश्चर्य तो तब होता है कि वर्ष 2014 में उस फायर की NOC ली जाती है जिसका मेनोफैक्चरिंग वर्ष 2016 है। यह वह सच है जिसे कागजों के माध्यम से ग़ुमराह नही किया जा सकता। अगर सच मे कोई कार्यवाही करनी है और जनता को नया देना है तो एलडीए एक कमेटी बनाकर, जांच कर ले तो सच्चाई सामने आ जायेगी।
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