
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने पुणे में आयुर्वेद ग्राम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयुर्वेद ग्राम के अध्यक्ष डॉ0 सदानन्द देशमुख, डॉ0 शिवकुमार देशमुख, डॉ0 डी0वाई0 पाटील विद्यापीठ के कुलपति डॉ0 पी0डी0 पाटील, पार्षद स्वप्नाली सायकर सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे। आयुर्वेद ग्राम में एक ही छत के नीचे समस्त आयुर्वेद उत्पाद उपलब्ध होंगे। डॉ0 सदानन्द देशमुख को धन्वन्तरि दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नई दिल्ली में धन्वन्तरि सम्मान से अलंकृत करेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद हमारे देश की परम्परागत चिकित्सा पद्धति है। चरक संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ आयुर्वेद के स्रोत हैं। महर्षि चरक ने आयुर्वेद को शाश्वत ज्ञान बताया। पूरे विश्व में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रति जिज्ञासा है तथा विदेशों में इस पर शोध किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में परम्परागत उपचार करने वाले वैद्यों के पास से आयुर्वेद के ज्ञान को संकलित करके संग्रह करने की जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद के विकास के लिए प्रधानमंत्री ने स्वतंत्र आयुष विभाग का गठन किया है।उन्होंने कहा कि भारत में औषधि के रूप में जड़ी.बूटियों का विशाल खजाना है। आयुर्वेदिक औषधियाँ मूलतरू प्रकृति से प्राप्त होती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण अनेक परम्परागत वनस्पतियाँ, जड़ी.बूटियों आदि के विलुप्त होने का खतरा बढ़ा है। आयुर्वेद का विकास उसकी औषधियों की उपलब्धता पर निर्भर है। आयुर्वेद पद्धति से अनेक असाध्य रोगों का निदान संभव है। रोगी को समय पर प्रमाणिक दवा मिलेगी तो रोगी के साथ.साथ समाज को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी वनस्पतियों का वर्गीकरण करके उन्हें पहचान कर संरक्षित करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने आयुर्वेद ग्राम की संकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास से आयुर्वेद पद्धति तथा रोगियों को निश्चित रूप से लाभ होगा। रोगियों को औषधि के लिए इधर.उधर न भटककर सीधे एक ही छत के नीचे सभी औषधियाँ उपलब्ध होंगी। सौन्दर्य प्रसाधन में भी आयुर्वेद उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ी है। भारत में आयुर्वेद पर विस्तृत अनुसंधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की ताकत को पहचानकर स्वास्थ्य लाभ के लक्ष्य को प्राप्त करें।
डॉ0 सदानन्द देशमुख ने आयुर्वेदिक पद्वति पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद के महत्व के साथ.साथ लोगों का इसकी ओर रूझान बढ़ा है। नाड़ी परीक्षण आयुर्वेद की देन है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के उत्पादों को एक छत के नीचे उपलब्ध कराने के लिए भारत एवं विदेशों में भी इसी प्रकार के आउटलेटस स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे।
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