नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज नई शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) को मंजूरी दे दी है. इसके मुताबिक पांचवी कक्षा तक कम से कम और अगर आठवीं और उससे आगे भी मुमकिन होगा, तो स्थानीय भाषा या मातृभाषा में पढ़ना होगा. यानी कि हिंदी, अंग्रेजी जैसे विषय भाषा के पाठ्यक्रम के तौर पर तो होंगे, लेकिन बाकी पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे.
छठी से शुरू होंगे वोकेशनल पाठ्यक्रम
वोकेशनल पाठ्यक्रम कक्षा छठी से शुरू हो जाएंगे. बोर्ड परीक्षा को ज्ञान आधारित बनाया जाएगा और उसमें रटकर याद करने की आदतों को कम से कम किया जाएगा. बच्चा जब स्कूल से निकलेगा, तो ये तय किया जाएगा कि वो कोई न कोई स्किल लेकर बाहर निकले.
रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में भूमिका निभाएंगे बच्चे
बच्चे स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में भी भूमिका निभाएंगे. अब तक रिपोर्ट कार्ड केवल अध्यापक लिखते थे, लेकिन नई शिक्षा नीति में तीन हिस्से होंगे. पहला बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए. उच्च शिक्षा में भी छात्रों के पास विकल्प रहेगा. स्नातक चार साल और तीन साल दोनों विकल्प रहेंगे. अगर छात्र चार साल का स्नातक लेता है, तो उसे पीजी में एक साल ही लगेगा. साथ ही अगर कोई छात्र अपने कोर्स के दौरान किसी वजह से पढ़ाई छोड़ देता है, तो फिर एक तय समय के बाद उसे अपनी पढ़ाई वहीं से दोबारा जारी करने की भी आजादी रहेगी.
नई शिक्षा नीति में केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में विषय चुनने में फ्लेक्सेबिलिटी दी जाएगी, ताकि छात्रों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो और वो अपने मनपसंद विषयों में शिक्षा पूरी कर सकें. इसके अलावा अब छात्रों के तकनीक पर विशेष जोर दिया जाएगा. ई-लर्निंग को लेकर विशेष प्रयास रहेंगे कि कोई भी इससे महरूम न रहे.
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