
सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार से कई सख्त सवाल पूछे हैं. शुक्रवार को अदालत ने इस मामले पर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि क्या इस फैसले को पूरी तरीके से गोपनीय रखा गया था? इसके अलावा सरकार द्वारा तय नकद निकासी की अधिकतम सीमा का पालन क्यों नहीं किया जा रहा? मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सहकारी बैंकों को लेन-देन का अधिकार देने की बात भी कही. अदालत ने नोटबंदी पर कई सवालों की सूची तैयार की है और सरकार से 14 दिसंबर तक इनका जवाब देने के लिए कहा है.
सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने केंद्र सरकार का बचाव किया. उन्होंने कहा कि सरकार नोटबंदी के बाद लोगों की परेशानी कम करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है और कहीं भी हालात खराब नहीं हैं. रोहतगी ने कहा कि सरकार इस मामले पर हाथ पर हाथ डाले नहीं बैठी है. इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अगले 10 से 15 दिनों में इस फैसले की वजह से पैदा हुई कठिनाइयों का समाधान कर लिया जाएगा.
उधर, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सरकार पर कई आरोप लगाए. उन्होंने अदालत को बताया कि नोटबंदी की वजह से पैदा होने वाली मुश्किलों से लड़ने के लिए सरकार ने कोई तैयारी नहीं की थी. प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि एटीएम में पैसे नहीं हैं और सहकारी बैंकों के साथ भेद-भाव किया जा रहा है.
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