पिछले दस सालों में बाबा रामदेव के पास अरबों खरबों की सम्पत्ति भी अब जनता को सोचने पर मजबूर कर रही है
लखनऊ,। नोट बंदी को 22 दिन बीत चुके है लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी अब मेट्रो सिटी की 99 फीसदी जनता ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नए पाॅच सौ के नोट के दिदार नही किये है। जनता में इस बात का चर्चा है कि बैंक के लोग और चंद धन्नासेठो ने नए नोटों के साथ पाॅच सौ का नोट भी अपनी तिजोरी में कैद कर लिये है। अब जनता विरोधी दलों की इस बात पर विश्वास करने को मजबूर हो रही है कि श्री मोदी ने एक प्रतिशत धन्नासेठों को छोड़कर 99 फीसदी लोगों पर हमला कर दिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि एक प्रतिशत के पास 99 फीसदी काला धन भरा पड़ा है। यही नही इतना समय बीत जाने के बाद भी मात्र दस से 15 फीसदी कालाधन बाहर आ पाया है जबकि अधिकत्तर लोग सरकार के लालच देने के बावजूद कालाधन जमा करने के पक्ष में नही बल्कि उसे नष्ट कर देने की मंशा बनाए दिख रहे है।
वैसे भी नोट बंदी के बाद से जितनी भी नई करेंसी जनता के हाथ लगी है वह बाजार में दिखाई नही पड़ रही है। पुराने नोटों की की अदलाबदली का खेल भी लगभग खत्म हो गया है। लोगों को कुछ पैसे का लालच देकर नोट बदलने वालों की संख्या नगण्य सी हो गई है। इसके पीछे बाजार मंें यह तर्क दिया जा रहा है कि अन्दरखाने से कालाधन सफेद कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि अफसरों और इंजीनियरों ने अपना पैसा बैंक के साथ ही अन्य बड़े दलालों तथा अभी तक पुरानी नोटों के चलन वाले विभाग जैसे परिवहन, स्टाम्प एवं पेट्रोल पम्पों के माध्यम से अपना पाॅच सौ और हजार रूपये का नोट सौ के नोटों में परिवर्तित कराने का खेल जारी है। इधर अब पाॅच सौ के नोट न आने तथा बैंकों को 22 दिनों के बाद भी जरूरत के अनुपात में 20 प्रतिशत नई करेंसी की आपूर्ति नही हो पाई है। अब तो जनता श्री मोदी के भाषणों को लेकर छीटाकशी की जा रही है। बैंक के कर्मचारी भी यह मान रहे है कि अगले छह सालों तक लगातार पाॅच सौ रूपये की नोट छापी जाए तब देश की जरूरत के हिसाब से रूपया छप पाएगा। उधर यह भी कहा जा रहा है कि लोगों के पास पर्याप्त मात्रा में पुरानी करेंसी भरी पड़ी है लेकिन वह इतने नाराज कि किसी भी हालत में मोदी सरकार के खजाने में अपनी रकम नही जमा करना चाहते। यही नही उनका जनता का यह भी मत है कि अगर वाकई मोदी को काला धन एकत्रित करना था तो सबसे पहले देश के उन घरानों पर हमला करते जिन्होंने पिछले 15 से 20 सालों में कुबेर बन गए है। इनकी सूचना प्रधानमंत्री को है। यही नही पिछले दस सालों में बाबा रामदेव के पास अरबों खरबों की सम्पत्ति भी अब जनता को सोचने पर मजबूर कर रही है।
भारत में कई दल पिछले बीस सालों में तेजी से उभरे और उनकी वैभवशाली स्थिति का जनता को भी पता है उन पर भी श्री मोदी नकेल नही डाल सके ऐसे में एक बात तो शंका पैदा करती है कि बहुत बड़े बड़े दावें करने वाले मोदी जी ने सभी पहलुओं पर विचार न करते हुए पहले 99 फीसदी जनता पर हमला कैसे कर दिया जबकि वे चाहते तो सबसे पहले देश के सिर्फ एक फीसदी महाभ्रष्टों पर हमला कर 99 फीसदी काला धन एकत्रित कर सकते थे।
एक सवाल यह भी उठता है कि हर प्रान्त में मात्र 500 ऐसे व्यक्ति थे जिनके पास काला धन पर्याप्त मात्रा में था या है इन पर अगर मोदी जी हमला करते तो उन्होंने 99 फीसदी जनता का वो समर्थन मिलता जिसकी वे कल्पना भी नही कर सकते थे लेकिन उन्होंने उस एक फीसदी जनता को छोडकर सीधे 99 फीसदी पर हमला कर जनता के साथ बहुत अच्छा नही किया है। यह भी कहा जा रहा है कि यह आर्थिक अराजकता अगले एक साल तक जारी रहेगी और काला धन का मात्र दस फीसदी ही सरकार के हाथ लग पाएगा।
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