
लखनऊ,। नोटबंदी से परेशान किसानों ने विधानभवन के सामने मुफ्त आलू व धान का वितरण करके विरोध जताया। भारतीय किसान यूनियन ने फसल न बिकने से परेशान किसानों की समस्या का समाधान न होने पर सांसद, विधायक व सभी जनप्रतिनिधियों को उनके घर पर जाकर धान, गेहूं और आलू के साथ दूध देने की घोषणा की है। किसानों का प्रर्दशन बुधवार को सुबह करीब सात बजे शुरू हुआ।
बड़ी संख्या ट्रैक्टर ट्रालियों पर लाद कर किसान विधान भवन के सामने पहुंचने लगे थे। किसानों ने यहां पर विरोध स्वरूप राहगीरों को धान व गेहूं बांटना शुरू कर दिया। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा ने बताया कि नोटबंदी के कारण किसानों की फसल नहीं बिक रही है। पूरे प्रदेश में कहीं धान की खरीद नहीं हो रही है। नतीजा यह है कि बिचैलिये 14.70 रुपये किलो समर्थन मूल्य की धान को पांच से सात रुपये किलो बेचने को मजबूर है। इसी तरह से किसानों के पास लाखों टन आलू ढेर हैं। किसान को इसका दाम रुपये किलो भी नहीं मिल रहा है। अगर आलू बिक रहा है तो उसके एवज में उन्हें पुराने नोट दिए जा रहे हैं। इसके किसानों के लिए स्थिति बेहद खराब होती जा रही है।
किसान यूनियन नेताओं ने कहा कि इसमें नोटंबदी के अलावा प्रशासन व शासन स्तर से भी कई समस्याएं है। मगर इनका निराकरण नहीं किया जा रहा है। इसके विरोध में जल्द ही किसान सभी जनप्रतिनिधियों व बड़े अधिकारियों के घर पर मुफ्त धान, आलू और दूध देकर अपना विरोध जारी करेंगे। उससे भी मामला नहीं सुलझा तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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