मुंबई: मोदी सरकार की दो महीला मंत्रियों सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे के बाद अब तीसरी महिला मंत्री पंकजा मुंडे भी विवादों में आ गई है। महाराष्ट्र सरकार में वुमेन एंड चिल्ड्रेन डेवलपमेंट मिनिस्टर पंकजा मुंडे पर 206 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगा है।
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक पंकजा मुंडे 15 जून को अहमदनगर जिला परिषद की प्रेसिडेंट मंजूश्री गुंड ने एक लेटर लिख कर बताया कि सरकार की ओर से आदिवासी स्टूडेंट्स में बांटे जा रहे मूंगफली पट्टी या चिक्की (मूंगफली के दाने और गुड़ से तैयार होने वाला) में मिट्टी मिली है।
मंत्री होते हुए मुंडे ने ही अन्य सामान जैसे चटाई, किताब, वाटर फिल्टर्स के साथ ही चिक्की की खरीदारी को मंजूरी दी थी। आरोप लगाया जाता है कि मुंडे ने नियमों की अवहेलना कर कंट्रैक्टर को 206 करोड़ रुपए का ऑर्डर दे दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि बिना टेंडर बुलाए मनपसंद कंपनियों को ये आदेश दिए गए। मुंडे ने 13 फरवरी को 24 गवर्नमेंट रिजोल्यूशन के जरिए खरीददारी का आदेश दिया था।
पंकजा मुंडे द्वारा एक दिन में 24 गवर्नमेंट रिजॉल्यूएशन लाया गया जो कि महाराष्ट्र में एक रिकॉर्ड है। ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले को महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार का पहला घोटाला कहा जा सकता है और पंकजा मुंडे इसके केंद्र में हैं।
नियमों के मुताबिक 3 लाख से ज्यादा की खरीद सिर्फ ई-टेंडरिंग के जरिए की जा सकती है। फडणवीस ने रेट कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के जरिए खरीदने पर बैन लगा दिया था, जिसमें मोलभाव करके चीज़ें खरीदी जाती थीं। फाइनैंस मिनिस्टर सुधीर मुंगन्तीवर ने इस नियम की पुष्टि करते हुए अखबार से कहा, ‘मैंने साफ कहा है कि 1 लाख से ज्यादा की खरीद के लिए टेंडर मंगवाए जाएं।’स्टूडेंट्स के लिए कॉपियां नवी मुंबई की कंपनी जगतगुरु प्रिंटिंग प्रेस से 5.6 करोड़ में खरीदी गईं। पेमेंट चेक इसके मालिक भानुदास टेकावडे के नाम पर काटा गया, न कि कंपनी के नाम पर।
इंटिग्रेटेड चाइल्ड डिवेलपमेंट सर्विसेज कमिश्नर विनिता सिंहल ने नासिक की कंपनी एवरेस्ट से वॉटर फिल्टर खरीदने को अनुमति दी थी। उन्होंने एक यूनिट के लिए 4500 रुपये की इजाजत दी थी, मगर मुंडे ने कीमत को बढ़ाकर 5,200 रुपए कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक मुंडे ने इस तथ्य को भी नजरअंदाज कर दिया कि एवरेस्ट तो खुद यह प्रॉडक्ट बनाती भी नहीं, बल्कि अलग-अलग कंपनियों से सामान लेती है। ऐसा करना नियमों का साफ उल्लंघन है।
मेडिसिन किट के लिए दो कॉन्ट्रैक्टर्स को ठेका दिया गया। इनमें से एक ने 720 रुपए में एक किट दी, जबकि 500 रुपए प्रति किट का ही प्रावधान था। 500 रुपए में किट आ जाए, इसके लिए मुंडे ने उसके अंदर से टैबलेट्स की संख्या कम कर दी।
खराब हो चुकी चिक्की भी नियमों का उल्लंघन है। सेंट्रल परचेज़ ऑफिस कमिश्नर राधिका रस्तोगी ने अप्रैल 2013 में सिंधुदुर्ग के एनजीओ से चिक्की लेने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। मगर मुंडे ने उसी एनजीओ सूर्यकांता सहकारी महिला संस्था को 80 करोड़ का ठेका दे दिया।
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