
लखनऊ,। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आज पीसीएस अफसर के साथ वकीलों की मारपीट को बेहद निन्दनीय बताते हुए। इस मामले में पीसीएस एसोसिएशन के आन्दोलन को अपना समर्थन ही नही दिया बल्कि शीघ्र ही मामले का न्याय पूर्ण तरीके से निस्तारण न होने तथा दागी और आरोपी वकीलों पर कठोर कार्रवाई न होने पर पीसीएस एसोसिएशन के तरह हड़ताल पर जाने का संकेत दिया है। आज इस सम्बंध में की गई परिषद के उच्चाधिकार समिति की बैठक में इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार के उपरान्त बार काउन्सिल आॅफ इण्डिया से मांग की गई है कि सिर्फ दस फीसदी अपराधिक तथा उदण्ड प्रवृत्ति के वकीलों के कारण न्याय संवर्ग की छबि खराब हो रही है इसलिए ऐसे वकीलों को चिन्हित कर इनके लाइसेंस ही न कर दिये जाए बल्कि इनके खिलाफ आम आपराधी की तरह कार्रवाई भी की जाए।
बैठक में परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष यदुवीर सिंह, महामंत्री शिवबरन सिंह यादव, भूपेश अवस्थी, अविनाशचन्द्र श्रीवास्तव, संजीव गुप्ता, अमिता त्रिपाठी, एस.के. पाण्डेय, दिवाकर राय सहित दो दर्जन से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में पीसीएस अधिकारी एसीएम तृतीय अनिल मिश्रा के साथ कुछ वकीलों द्वारा मारपीट किए जाने तथा वकीलों की तरफ से पीड़ित अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किऐ जाने के प्रकरण पर गम्भीर विचार विमर्श के बाद कहा गया कि यह प्रकरण अत्यंत संवेदनशील है। बैठक में कहा गया कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में यह कोई पहला प्रकरण नही है चंद विवादित और उदण्ड वकीलों द्वारा पहले भी इस तरह की कई घटनाए कर शहर की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के साथ ही, कानून के रखवालों द्वारा कानून अपने हाथ में लेने का कृत्य किया जा चुका है।
बैठक में कहा गया कि यह गम्भीर प्रवृत्ति का मामला है इस मामले में यह भी सोचनीय पहलु है कि जब अधिवक्ता न्यायिक अधिकारी पर हमला कर सकते है और उन पर रहमों करम किया जाता है तो उनका अगला निशाना शीर्ष आला अफसर भी हो सकते है। बैठक में यह भी कहा गया कि अमूनन देखा यह जाता है कि जब ऐसे प्रवृत्ति के अधिवक्ता गैर कानूनी काम करते है तो उन पर पुलिस भी कार्रवाई करने से कतराती है परिणाम यह होता है कि दस फीसदी के तादत में मौजूद उण्दण अधिवक्ताओं के हौसले बढ़ जाते है।
बैठक में पीसीएस एसोसिएशन के आन्दोलन को पूर्ण समर्थन के साथ ही परिषद की तरफ से एक पत्र पीसीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश प्रताप सिंह और सचिव पवन गंगवार को प्रेषित कर हड़ताल को समर्थन एवं जरूरत पड़ने पर हड़ताल में शामिल होने के बात लिखी गई है। यही नही यह भी मांग की गई है कि राजधानी में पिछले समय और तत्कालीन श्री मिश्रा के साथ हुई मारपीट के मामले में दागी वकीलों की जांच कराकर बार काउन्सिल आॅफ इण्डिया दागी वकीलों के रजिस्ट्रेशन रद्द कर उन पर कानूनी कार्रवाई कराये।
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