नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का पहला ओबीसी प्रधानमंत्री बताकर घिर गए हैं। जेडीयू ने अमित शाह के इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि मोदी को ओबीसी प्रधानमंत्री बताकर ‘जातीय नेता’ के तौर पर ‘बेचने’ की कोशिश की जा रही है। जेडीयू के महासचिव के. सी. त्यागी ने कहा कि देश को पहले ओबीसी प्रधानमंत्री देने का अमित शाह का दावा गलत है। इस पद पर पूर्व में रहे चौधरी चरण सिंह और एच. डी. देवेगौडा भी ओबीसी समुदाय से आते हैं।बता दें कि शुक्रवार को बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर हुए चुनाव की मतगणना की गई। विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल कहे जा रहे इस मुकाबले में राजग को 13 सीटेों पर जीत मिली है, जबकि महागठबंधन को मात्र 10 सीटों से संतोष करना पड़ा। अमित शाह ने इस चुनाव में भाजपा को मिली बड़ी जीत का जिक्र करते हुए कहा था कि जनता परिवार ‘फुस्स पटाखा’ साबित हुआ है। वहीं ओबीसी वोटरों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने पहला प्रधानमंत्री दिया और अधिकतर मुख्यमंत्री इसी समुदाय के हैं। दरअसल अमित शाह ने ओबीसी कार्ड खेलते हुए दावा किया था कि ज्यादातर मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग से आते हैं और उसने देश को इस वर्ग से आने वाला पहला प्रधानमंत्री भी दिया है।
अमित शाह के इस बयान पर पलटवार करते हुए राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव ने कहा, ‘मोदी को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री बताकर अमित शाह बहुत बड़ा झूठ बोल रहे हैं। 1996 में देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बन गए थे।’बिहार विधान परिषद में मिली हार पर लालू ने कहा, ‘ बीजेपी गलतफहमी का शिकार हो गई है। हमारे कई उम्मीदवार बहुत कम मतों से हारे हैं।’
दूसरी तरह जेडीयू नेता के. सी त्यागी ने क्चछ्वक्क पर प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री को जातीय नेता बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि गुजरात में वह ‘हिंदू हृदय सम्राट’ के तौर पर जाने जाते थे। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने विकास के नाम पर वोट मांगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मोदी को ‘विकास पुरुष’ के तौर पर पेश किया गया लेकिन बिहार में उन्हें ओबीसी के नेता के तौर पर पेश किया जा रहा है।
जेडीयू के महासचिव ने कहा कि वे बीजेपी से पूछना चाहते हैं कि उनके प्रधानमंत्री की असली पहचान क्या है? रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री ने जातीयता के खिलाफ बयान देकर वाहवाही बटोरी थी पर बीजेपी उन्हें आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में ओबीसी नेता के तौर पर ‘बेचने’ की कोशिश में लगी है।
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