
लखनऊ । रेरा कोर्ट ने अंसल एपीआई के तमाम मामलों की सुनवाई करने के बाद 91, योजनाओं की जांच के आदेश दिए हैं । ये सारी योजनाएं लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर चल रही थी । जांच एजेंसी से अपेक्षा की गई है कि इन योजनाओं का ऐसा पोस्ट मार्टम किया जाये कि धांधली कैसे की गई, और करने मे कौन कौन शामिल रहा है और इससे सरकार को कितनी हानि हुई है ।
रेरा सदस्य बलविंदर कुमार की कोर्ट में 403, शिकायतें आई । सुनवाई में पाया गया कि बिल्डर ने रेरा एक्ट 2016,का खुला उल्लंघन किया है । इन शिकायतों में पाया गया कि अंसल एपीआई ने अपनी योजनाओं का लाच तो की और ब्रायर्स को प्रलोभन भी दिए की निश्चित समय में विकास कर योजना को पूरा कर कब्जा दे दिया जायेगा पर ऐसा नहीं हुआ ।
सुनवाई के दौरान नौ बिन्दुओं पर सवाल खड़े किये गये और 15, दिन के भीतर अंसल एपीआई को जवाब देने को कहा गया है । रेरा ने अंसल से उसके एकाउंट के डिटेल भी प्रोजेक्ट के हिसाब से मांगे हैं। अधूरी परियोजना की सूची भी तलब की गई है । रेरा ने अपने आदेश में एलडीए व आवास विकास परिषद को जिम्मेदारी सौंपी है कि वह इस पर कार्रवाई कर सूचित करें ।
रेरा ने अंसल एपीआई की 6500, एकड़ की हाईटेक टाउनशिप का फोरेंसिक आडिट कराने का भी आदेश दिया है ।
रेरा सचिव खुद अंसल एपीआई व सहयोगी कंपनियों के ऑडिट पर नजर रखेंगे। ऑडिट में देखा जाएगा कि अंसल एपीआई, सहयोगी कंपनियों या कंसोर्सियम के खाते से फंड कहां-कहां भेजा गया? इसके अलावा प्रोजेक्टों में हुई देरी और इसके लिए जिम्मेदार भी तय किए जाएंगे?
10 फीसदी से अधिक रकम खर्च करने को लेनी होगी अनुमति
रेरा के आदेश के मुताबिक, परियोजनाओं के एस्क्रो एकाउंट से 10 फीसदी से अधिक खर्च करने के लिए रेरा की अनुमति लेनी होगी। यह आदेश उन बिल्डर कंपनियों पर भी लागू होगा, जिन्होंने एफएसआई में भूखंड या प्रोजेक्ट अंसल एपीआई से लिए हैं।
बिना बिकी संपत्तियों से जुटाएंगे रकम, लौटाएंगे आवंटियों का पैसा
रेरा सदस्य बलविंदर कुमार का कहना है कि सुशांत गोल्फ सिटी के फंड दूसरे प्रोजेक्टों में ट्रांसफर किए गए हैं। इस कारण प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसा बिल्डर के पास बचा ही नहीं। उनके अधिवक्ता ने खुद खाते में पैसा न होने की बात स्वीकार की है। एक ऑडिटर भी नियुक्त किया जा रहा है, जो हाइटेक सिटी में मौजूद बिना बिक्री वाली संपत्तियों को चिह्नित करेगा। ऐसी संपत्तियों की सूची तैयार करके उननी कीमत का आकलन किया जाएगा। उससे मिलने वाली रकम से आवंटियों का पैसा लौटाया जाएगा। अंसल एपीआई बिना रेरा की अनुमति के नई संपत्तियां भी नहीं बेच सकेगा।
करी एंड ब्राउन को मिल सकता ऑडिट
बलविंदर कुमार का कहना है कि यूके की कंपनी करी एंड ब्राउन के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इससे फोरेंसिक ऑडिट कराया जा सकता है। नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ यह कंपनी दुनिया के प्रमुख सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के वित्तीय ऑडिट का काम देखती है।
अंसल नहीं बता पाया कि कैसे पूरे होंगे प्रोजेक्ट
रेरा में बिल्डर की तरफ से कोई ठोस कार्ययोजना नहीं दी जा सकी है। अंसल एपीआई के अधिकारी रेरा को यह बताने में विफल रहे कि किस तरह अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा। कई मामलों में तो प्रोजेक्ट पूरा करने की पूर्व निर्धारित तारीख से भी चार-पांच साल बाद की डेडलाइन बताई गई है।
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