अमित शाह के लखनऊ दौरे के बाद एक बार फिर योगी मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाए तेज


 

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लखनऊ  |  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के  लखनऊ दौरे के बाद एक बार फिर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। वहीं मंत्रिमंडल में जातीय व क्षेत्रीय संतुलन बनाने के लिए कई नए चेहरों को स्थान दिया जा सकता है। कुछ मंत्रियों को हटाकर संगठन में तो संगठन से कुछ पदाधिकारियों को मंत्रिमंडल में लाया जा सकता है।

दरअसल, 24 अक्तूबर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक के दौरान सरकार और संगठन के बड़े प्रमुखों के साथ बैठक की थी। इसमें केंद्रीय नेतृत्व आसन्न लोकसभा चुनावों में भाजपा की मौजूदा स्थिति को लेकर खासा चिंतित दिखा। इस बैठक में श्री शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डा.दिनेश शर्मा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय और महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल के साथ प्रदेश के सपा-बसपा कांग्रेस व अन्य छोटे दलों के प्रस्तावित महागठबंधन के साथ प्रदेश के राजनीतिक हालातों पर भी चर्चा की थी।

हालांकि, सरकार और प्रदेश नेतृत्व की आपसी बैठकों में मौजूदा मंत्रियों को हटाने और उनके स्थान पर नए मंत्रियों को रखने के बारे में विस्तृत चर्चा के साथ ही सूची भी तैयार की जा चुकी है। अब इस सूची पर केंद्रीय नेतृत्व व राज्य सरकार से अमल की है।

मंत्रिमंडल का मौजूदा स्वरूप जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से असंतुलित माना जा रहा है। इस मंत्रिमंडल में प्रदेश के करीब 45 जिलों का प्रतिनिधित्व ही नहीं है। बीते दिनों भाजपा के पिछड़ी जाति के सम्मेलनों में गुर्जर व कई अन्य वर्गों को मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की मांग की थी।


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