गणतंत्र दिवस पर दिखा भारतीय संस्कृति और सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन


 

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नई दिल्‍ली: 67वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की आन-बान शान का उत्सव मनाया गया। गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि रहे फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद। इसके साथ उनके देश के सैनिकों ने भी परेड में हिस्सा लिया। यह पहला अवसर है जब गणतंत्र दिवस परेड में किसी विदेशी सेना ने हिस्सा लिया।

परेड शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित करके शहीदों को श्रद्धांजलि दी। समारोह की शुरुआत शहीदों के सम्मान से हुई। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को मार गिराने वाले शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया, जो शांति काल में वीरता का सर्वोच्च सम्मान है।

राजपथ पर आज भारत की संस्कृति के रंगों और रक्षा क्षेत्र की ताकत का प्रदर्शन किया गया। परेड में जहां सारी दुनिया में सबसे अधिक विभिन्नता वाले देश भारत को एक सिरे में पिरोने वाली उसकी हर कोने की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाया, वहीं अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइलों, विमानों और भारतीय सैनिकों के दस्तों ने देश के किसी भी चुनौती से निपट सकने की ताकत का अहसास कराया।


आज ही के दिन 1950 में देश ने मौजूदा संविधान को अपनाया था और तब से लेकर आज तक हम इस दिन को गणतंत्र दिवस के तौर पर मना रहे हैं। सुरक्षा कारणों से इस बार गणतंत्र दिवस परेड में 25 मिनट की कटौती की गई। इसे 115 मिनट की बजाय 90 मिनट का कर दिया गया।


परेड के शुभारंभ के रूप में सेना के चार हेलिकॉप्टरों ने राजपथ के ऊपर से उड़ान भरते हुए गुलाब के फूलों की पंखुडियां बिखेरीं। इन हेलिकॉप्टरों पर देश के तिरंगे के अलावा तीनों सेनाओं के ध्वज लहरा रहे थे। परेड में पहली बार 36 खोजी कुत्तों का दस्ता भी निकला।

विविधता में एकता का मनमोहक प्रदर्शन
राजपथ पर संस्कृति और देश के उज्ज्वल भविष्य की झलक भी दिखाई गई। गोवा की झांकी में यहां की जागोर जनजाति और गुजरात की झांकी में गौरव की पहचान गीर के जंगल दिखाए गए। जम्मू-कश्मीर की झांकी में मेरा गांव मेरा जहां यानी स्वच्छ एवं हरित अभियान का प्रचार किया गया।

राजस्थान की झांकी में जयपुर के गौरव हवा महल को दिखाया गया। हवा महल को 1799 में सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था। चंडीगढ़ की झांकी में सपनों के शहर में खुला स्वागत करते दिखाया गया। ओडिशा की झांकी में बंदाण महोत्सव दिखाया गया। बिहार की झांकी में चंपारण सत्याग्रह को दिखाया गया।

कर्नाटक की झांकी में कॉफ़ी की धरती कोडगु को दिखाया गया। तमिलनाडु की झांकी में थोडा जनजाति की झलक दिखाई गई। उत्तराखंड की झांकी में रम्माण उत्सव की झलक दिखी। उत्तर प्रदेश की झांकी में जरदोई कला प्रदर्शित की गई।

वायुसेना के हैरतअंगेज करतब
सबसे अंत में रोमांच से भर देने वाले वायु सेना के अत्याधुनिक विमानों को राजपथ के ऊपर से हैरतअंगेज कारनामों के साथ उड़ान भरते देख कर उन विमानों की ताकत के साथ ही वायुसेना के पायलटों का हुनर और जांबाज़ी का अहसास हुआ।  परेड के अंत में इंडिया गेट को जैसे चूमते हुए गुजर जाने का अहसास देने वाले भारतीय वायुसेना के 27 विमानों ने इस बार फ्लाई पास्ट में हिस्सा लिया। फ्लाई पास्ट की अगुवाई एमआई-17 वी5 हेलिकाप्टरों ने अंग्रेजी वाई की शक्ल में उड़ान भरी। इसके दूसरे चरण के रूप में एमआई 35 के तीन हेलिकॉप्टरों ने चक्र शक्ल में और उसके बाद तीन सी.130 सुपर हर्कुलिस विशाल विमानों ने उड़ान भरी। इसके बाद एक सी.17 और दो सुखोई.30 एमकेआई विमानों ने ग्लोब फार्मेशन में उड़ान भरी। लड़ाकू विमानों की बारी आने पर पांच जगुआर विमानों ने तीर की शक्ल में राजपथ के ऊपर से उड़ान भरी और उसके बाद पांच मिग 29 विमानों ने उसी रूप में परवाज की।

 


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