इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 का संशोधित ड्राफ्ट जारी – बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरियों ने जताया विरोध : 29 सितम्बर को दिल्ली में बुलाई गई बैठक में होगी आंदोलन की घोषणा


 

 

 

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lucknow | केन्द्र सरकार ने 07 सितम्बर को इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 का संशोधित ड्राफ्ट जारी करते हुए  इस पर राज्य सरकारों और केवल निजी घरानों से 45 दिन में कमेन्ट मांगे हैं | ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन ने संशोधित ड्राफ्ट को  बिजली वितरण के निजीकरण की प्रक्रिया को तीव्र गति से लागू करने का दस्तावेज बताते हुए  कहा है कि फेडरेशन इस संशोधित ड्राफ्ट पर अपनी लिखित आपत्ति शीघ्र ही दर्ज कराएगा | फेडरेशन ने यह भी कहा है कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेक होल्डर बिजली कर्मचारी और बिजली उपभोक्ता हैं किन्तु केंद्र सरकार के विद्युत् मंत्रालय द्वारा जारी पत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 के संशोधित ड्राफ्ट पर बिजली कर्मचारियों , अभियंताओं और उपभोक्ताओं से कोई कमेंट नही मांगे गए है | इसके विपरीत  बिजली के क्षेत्र में कार्य कर रहे निजी घरानों से कमेंट मांगे गए हैं जिससे केंद्र सरकार की निजीकरण की नीति और नीयत साफ परिलक्षित हो रही है |
सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 को पारित करना चाहती है जिससे लोकसभा चुनाव के पहले देश में विद्युत् वितरण के निजीकरण का रास्ता साफ़ हो सके | उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सर्कुलर जारी होते ही यह निर्णय लिया गया कि निर्धारित समय में देश के सभी बिजली कर्मचारी व् इंजीनियर संगठनों द्वारा इस प्रस्ताव का लिखित विरोध किया जायेगा  और 29 सितम्बर को दिल्ली में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स की बैठक बुलाई गयी है जिसमे केंद्र सरकार की निजीकरण की नीति के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान किया जायेगा |
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 पर पूर्व विद्युत् मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई बार हुई वार्ता में उन्होंने बिल में पांच मुख्य संशोधन करने का आश्वासन दिया था |  पहला यह कि बिल राज्यों के लिए बाध्यकारी नही होगा अर्थात राज्य चाहें तो लागू करे या न करें | दूसरा यह कि विद्युत् आपूर्ति के लाइसेंस देने में निजीकरण की कोई बाध्यता नहीं होगी | तीसरा यह कि सभी विद्युत् आपूर्ति कंपनियों को सभी श्रेणी के ( घाटा उठाकर बिजली देने वाले उपभोक्ता ) उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करना अनिवार्य होगा | चौथा यह कि एक्ट के अनुसार राज्यों को पांच साल में रोड मैप देने का समय होगा और पांचवां यह कि रोड मैप के अनुसार एक क्षेत्र में कई बिजली आपूर्ति कम्पनियाँ बनाने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होगी अर्थात राज्य जितने वर्ष में करना चाहे करे या न करे | उन्होंने कहा कि विद्युत् मंत्रालय द्वारा जारी संशोधित ड्राफ्ट में इनमे से किसी बिंदु को शामिल नहीं किया गया है जिससे बिजली कर्मियों में भारी रोष है |
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 , 19 दिसंबर 2014 को लोकसभा में रखा गया था जिसे बिजली के मामलों की संसद की स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया था | स्टैंडिंग कमेटी ने 07 मई 2015 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को दे दी थी | इस बिल का सबसे प्रमुख प्राविधान बिजली वितरण और आपूर्ति को अलग अलग कर बिजली आपूर्ति का निजीकरण करना है जिसका बिजली कर्मी और इंजीनियर प्रारम्भ से ही विरोध कर रहे हैं |
बिल के अनुसार बिजली वितरण और विद्युत् आपूर्ति के लाइसेंस अलग अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत् आपूर्ति कम्पनियाँ बनाने का प्राविधान है | बिल के अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने (यूनिवर्सल पावर सप्लाई ऑब्लिगेशन ) की अनिवार्यता होगी जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा | स्वाभाविक है कि निजी आपूर्ति कम्पनियाँ मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप , गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी  और घाटा उठाएगी  |
उन्होंने बताया कि संशोधित बिल के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों व् गरीबी रेखा के नीचे के उपभोक्ताओं को बिजली की पूरी कीमत अदा करनी होगी और यदि केंद्र या राज्य सरकार उन्हें कोई सब्सिडी देना चाहती है तो यह सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के खाते में भेजी जाएगी | उल्लेखनीय है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 62 डी के मौजूदा प्राविधान अनुसार उपभोक्ता से बिजली की लागत उसकी भुगतान की क्षमता को देखते हुए तर्कसंगत ढंग से वसूल की  जाएगी जबकि संशोधित ड्राफ्ट में लिखा गया है कि नयी बनने वाली आपूर्ति कम्पनियाँ बिना किसी नुक्सान के उपभोक्ता से बिजली की पूरी लागत वसूल करेंगी | स्पष्ट है कि यह प्राविधान निजी घरानों को मुनाफ़ा देने और आम उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत है |
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गए संशोधित ड्राफ्ट पर फेडरेशन शीघ्र ही प्रपत्र जारी कर आम लोगों को इसके जनविरोधी प्राविधानों से अवगत कराएगी |


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