नए बने मुख्यमंत्री सचिवालय लोकभवन में बत्ती गुल, लेसा चीफ समेत पावर कॉरपोरेशन के 5 अफसर हटाए गए


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लखनऊ,। नए बने मुख्यमंत्री सचिवालय लोकभवन में सोमवार को बत्ती गुल हो गई। ठीक उसी वक्त मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने कार्यालय में पुहंच गए। इस पर घबराए अधिकारियों ने इधर-उधर हाथ-पैर मारे और बिजली नहीं आई तो मुख्यमंत्री नाराज होकर वहां से चले गए। इसके बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल ने कार्रवाई करते हुए लेसा के चीफ इंजीनियर समेत पांच इंजीनियरों को हटा दिया।

सोमवार को मुख्यमंत्री को लोकभवन में स्मार्ट फोन के लिए पोर्टल लांच करना था। साथ ही लैपटाप के लाभार्थियों से रूबरू होना था। इसके लिए मुख्यमंत्री लोकभवन पहुंचे और सीधे अपने कार्यालय कक्ष में गए लेकिन वहां बिजली गुल थी। उन्हें कुछ देर बाद प्रथम तल पर कार्यक्रम में पहुंचना था। इसके बाद आनन-फानन में प्रमुख सचिव ऊर्जा को बुलाया गया और उन्हें दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पावर कारपोरेशन के एमडी एपी मिश्र को भी बुलाया गया।इसके बाद उन्होंने मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और ट्रांसमिशन के पांच इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया। साथ ही मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी एसके वर्मा को तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। हटाए गए इंजीनियरों में लेसा के चीफ इंजीनियर आशुतोष कुमार, अधीक्षण अभियंता जीडी द्विवेदी और एसडीओ हुसैनगंज शैलेंद, ट्रांसमिशन कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता एके जायसवाल और अधिशासी अभियंता संजय पासवान शामिल हैं।

लेसा चीफ इंजीनियर का चार्ज फिलहाल लखनऊ जोन के चीफ इंजीनियर एके श्रीवास्तव को सौंपा गया है। अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त जिम्मा एपी शुक्ला संभालेंगे।पूरे मामले में मुख्यमंत्री के सख्त रुख को देखते हुए अफसरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय मानी जा रही है। मध्यांचल के तकनीकी निदेशक एसके वर्मा की जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉरपोरेशन प्रबंधन उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। लेसा को बताए बिना ठप की सप्लाई सीएम कार्यालय में बिजली सप्लाई ठप होने के पीछे ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के अफसरों की मनमानी मानी जा रही है। लेसा के चीफ इंजीनियर पद से हटाए गए आशुतोष कुमार का कहना है कि ट्रांसमिशन के अफसरों ने सोमवार को सप्लाई ठप करने की कोई जानकारी नहीं दी थी। बकौल आशुतोष ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन की ओर से 8 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक सप्लाई रोकने की सूचना थी।

हुसैनगंज के अधिशासी अभियंता ने जानकारी होने पर ट्रांसमिशन के अफसरों से विरोध जताया लेकिन वे पीजीआई लाइन को जोड़ने पर अड़े रहे। पूर्व में जानकारी होती तो हम वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते थे।


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