सियाचिन: बर्फ के नीचे से बाकी सभी 8 जवानों के शव निकाले गये


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जम्मू, हिमस्खलन में दब जाने के सात दिन बाद सियाचिन ग्लेशियर में बर्फ के ढेर के नीचे से बाकी सभी आठ जवानों के शव आज निकाल लिये गये। एक जवान का शव कल मिला था और एक बहादुर सैनिक आज चमत्कारिक तरीके से जिंदा मिला।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज यहां कहा, बाकी सभी आठ जवानों के शव हिमस्खलन वाली जगह से मिल गये हैं।

उन्होंने कहा, तीन फरवरी को तड़के जवानों की चौकी के पास हुए हिमस्खलन के बाद बर्फ के 30 फुट नीचे दब गये 10 जवानों का पता लगाने और उन्हें निकालने के लिए सियाचिन में शुरू किये गये अभियान में इन्हें निकाला गया।

अधिकारी ने कहा, लांस नायक हनुमनथप्पा कोप्पड को 30 फुट बर्फ के नीचे से जीवित निकालने में सफलता का श्रेय बचाव दलों के दढ़संकल्प को जाता है जो कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, हम अत्यंत दुख के साथ इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि बाकी नौ शहीदों के शव भी बचाव दलों ने निकाले हैं जिनमें एक जूनियर कमीशन्ड अधिकारी शामिल था।

अधिकारी ने कहा कि शहीदों के शवों को आवश्यक औपचारिकताओं के बाद यथासंभव जल्द उनके पैतक स्थानों को भेजा जाएगा।

मृत जवानों में सूबेदार नागेश टीटी (ग्राम तेजुर, हासन जिला, कर्नाटक), हवलदार इलुमलाई एम (ग्राम दुक्कम पराई, वेल्लूर जिला, तमिलनाडु), लांस हवलदार एस कुमार (ग्राम कुमानन तोक्षू, तेनी जिला, तमिलनाडु), लांस नायक सुधीश (ग्राम मोनरूथुरथ, कोल्लम जिला, केरल) और सिपाही महेश पीएन (गांव एचडी कोटे, मैसूर जिला, कर्नाटक), हैं।

हिमस्खलन का शिकार हुए जवानों में सिपाई गणेशन (ग्राम चोक्काथेवन पटटी, मदुरै जिला, तमिलनाडु), सिपाही रामा मूर्ति (ग्राम गुडीसताना पल्ली, कष्णा गिरी जिला, तमिलनाडु), सिपाही मुस्ताक अहमद (ग्राम परनापल्ले, कुरनूल जिला, आंध्र प्रदेश) और सिपाही नर्सिंग सहायक सूर्यवंशी (गांव मसकरवाडी, सतारा जिला, महाराष्ट्र) भी शामिल हैं।

विशेष उपकरणों की मदद से बचाव दल ने स्थान का पता लगाया जहां खुदाई का काम हुआ।
बहरहाल तेज गति से चलने वाली हवा और बर्फीले तूफान के कारण बचाव कार्य कई बार बाधित हुआ। बचाव दल कल उस स्थान पर पहुंचने में सफल रहा जहां सैनिक दफन हो गए थे और कोप्पाड़ को जिंदा बचा लिया गया।

अधिकारियों ने कहा, उनके जिंदा पाए जाने से पूरी टीम उत्साहित हो गई। जवानों में अचानक उर्जा का संचार हो गया। नौ सैनिकों के शव को भी बर्फ से बाहर निकाला गया।

कोप्पाड़ को जब बचाया गया तो वह होश में थे लेकिन ठंड से बोझिल और बात करने की स्थिति में नहीं थे। वह बुरी तरह पानी की कमी, हाईपोथर्मिक, हाईपोक्सिक, शर्करा की कमी और सदमे में थे।

वहां मौजूद चिकित्सकों ने तुरंत उनकी सांस वापस लाई जो वहां किसी के जीवित बचे होने की उम्मीद में पांच दिनों से तैनात थे।

उन्होंने कहा कि उनकी नस में गर्म तरल का संचार कर, गर्म ऑक्सीजन और बाहर से गर्मी देकर उपचार किया गया। बाद में उन्हें यहां के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भेजा गया।


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