
कानपुर | एनजीटी ने केडीए सिग्नेचर ग्रीन्स सिटी को कुछ राहत दे दी है। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित की गई कमेटी को निर्देश दिया है कि चार हफ्ते में एनओसी के लिए दिए गए केडीए के आवेदन का निस्तारण करे। इस आदेश से केडीए को एनओसी जल्द ही मिल जाने की आस बढ़ गई है।
केडीए ने एनजीटी में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इसमें एनजीटी द्वारा सिग्नेचर सिटी के निर्माण पर रोक लगाए जाने के आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया था। एनजीटी ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया था। केडीए की तरफ से यह दलील दी गई कि पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी न मिलना उनकी गलती नहीं है। इसके लिए केडीए ने करीब डेढ़ साल पहले ही आवेदन किया था। तब से यह मामला वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में लटका हुआ है। केडीए ने 29 जून 2016 को अथॉरिटी के एनओसी के लिए आवेदन किया था। 24 अक्टूबर को इसकी मीटिंग हुई थी। करीब 22 बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई थी। दिसंबर 2016 में सारे विभागों से एनओसी लेकर अथॉरिटी में जवाब भी दाखिल कर दिया था। मगर संकट तब खड़ा हुआ जब फरवरी 2017 में कमेटी खत्म हो गई। तब से कमेटी गठित नहीं हुई।
केडीए की यह भी दलील थी कि अप्रैल माह में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में केडीए को सीधे आवेदन करना पड़ा। उसकी बैठक जून में हुई। इसके बाद पहली बार सरकार ने नई कमेटी बनाई और कहा कि जिन प्रकरणों में निर्माण शुरू हो गया है उसे वॉयलेशन कमेटी में डाल दिया जाए। अब मामला उस कमेटी में ले जाने के लिए कहा गया। जुलाई में यह प्रकरण उस कमेटी में मामला गया। तब से लंबित है। केडीए ने यह भी कहा कि निर्माण पर से रोक हटा ली जाए क्योंकि रोजाना लाखों का नुकसान हो रहा है। एनजीटी ने रोक तो नहीं हटाई मगर पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी को निर्देश दे दिया कि हर हाल में चार हफ्ते के भीतर आवेदन का निस्तारण किया जाए। अधिशासी अभियंता राणा प्रताप सिंह ने कहा कि वे प्रयास करेंगे कि दो हफ्ते में ही एनओसी मिल जाए।
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