UP सिडको में करोड़ों के फर्जीवाड़ा में छह अधिकारी दोषी ,3 इंजीनियर तत्काल प्रभाव से निलंबित


इन सभी छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के भी आदेश दिये गये

लखनऊ | समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित यूपी स्टेट कांस्ट्रक्शन एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लि. (यूपी सिडको) में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में इस निगम के छह अधिकारी दोषी पाए गए, जिनमें से तीन रिटायर हो चुके हैं जबकि तीन कार्यरत अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इन सभी छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के भी आदेश दिये गये हैं। साथ ही जिन तीन ठेकेदार कम्पनियों के साथ मिलीभगत कर यह फर्जीवाड़ा किया गया, उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी। यही नहीं इन कंपनियों की निगम में जमा करीब 2.5 करोड़ रुपये की सिक्यारिटी मनी जब्त होगी और इन्हें ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया है। यह जानकारी यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक शिव प्रसाद ने दी है। उन्होंने बताया कि निलंबित होने वाले अभियंताओं में मुख्य अभियंता के.के.शर्मा, अधीक्षण अभियंता विनोद चंद पाण्डेय, सहायक अभियंता वासुदेव तिवारी शामिल हैं। तीन रिटायर हुए अधिशासी अभियंताओं में कालका प्रसाद, एके गोयल और सहायक अभियंता एसके अवस्थी के नाम शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में यूपी सिडको द्वारा वर्ष 2009 से निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। इस निर्माण कार्य में मेसर्स राज कंस्ट्रक्शन, अमरजीत इन्फ्रा स्ट्रक्चर प्रा.लि. और मेसर्स एस.एस.इंजीनियरिंग ठेकेदार कम्पनियां लगी हुई थीं। यूपी सिडको के उपरोक्त छह कार्मिकों द्वारा दुरभिसंधि करके इन ठेकेदार कम्पनियों को 4 करोड़ 80 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान करवा दिया गया।

 इस राशि का वर्धा विश्वविद्यालय से न तो सत्यापन करवाया गया और न ही वह कार्य ही पूरे करवाये गये जिनके एवज में उक्त अग्रिम भुगतान करवाया गया। शिकायत मिलने पर यूपी सिडको के प्रयागराज में तैनात अधीक्षण अभियंता शैलेन्द्र कुमार निगम की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने जांच करने के बाद जो अपनी रिपोर्ट दी उस रिपोर्ट के आधार पर प्रबंध निदेशक ने यह कार्रवाई की है।


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