ऐसी बौद्धिक संगोष्ठीयाँ नये-नये विचारों को उत्पन्न करती हैं जो राज्य के संचालकों के लिए विचार ऊर्जा का कार्य करती हैं: आलोक रंजन


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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय द्वारा 66वें संविधान दिवस के उपलक्ष्य पर 
आयोजित ‘एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी‘ का मुख्य सचिव ने किया उद्घाटन
लखनऊ:  बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय द्वारा 66वें संविधान दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित ‘एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी‘ का विधिवत उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित उ0प्र0 सरकार के मुख्य सचिव वरिष्ठ आई0ए0एस0 अधिकारी, चिन्तक एवं  नीतियों के क्रियान्वयनकर्ता श्री आलोक रंजन ने अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान एक दिग्दर्शक दस्तावेज है जिसके आधार पर व्यवस्थापिका नीतियों का निर्माण करती हैं और कार्यपालिका उससे निर्देशित और पे्ररित होकर उन नीतियों का कार्यान्वयन करती है। भारत का संविधान हमें एक मापदंड प्रदान करता है जिसके आधार पर हम अपने समस्त विचारों, योजनाओं की समीक्षा करते हैं और उसे संविधान के आत्मा के अनुकूल एक सकारात्मक दिशा की ओर ले जाते हैं।  उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के निर्माण में जिस नीव को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर ने अपने वैचारिक ऊर्जा और शक्ति से स्थापित किया, उसी के बल पर तमाम अन्तरविरोधों, व्यवधानों एवं असंगतियों के बावजूद भारतीय गणराज्य सफलतापूर्वक चल रहा है।
श्री रंजन ने कहा कि ऐसी बौद्धिक संगोष्ठीयाँ नये-नये विचारों को उत्पन्न करती हैं जो राज्य के संचालकों के लिए विचार ऊर्जा का कार्य करती है। प्रशासन का सीधा संबंध संविधान के साथ होता है जिससे प्राप्त ऊर्जा पर वह राज्य व समाज को सुचारू रूप से चलाता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि इन दोनों के बीच में एक ऐसा अन्तरसंबंध है जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इस सन्दर्भ में डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर की भूमिका ऐतिहासिक है जिसको सदियों हम बार-बार याद करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके विचारों के आधार पर हम एक न्यायोचित, प्रगतिशील, विकासउन्मुख एवं आधुनिक भारत का निर्माण कर सकते हैं।
बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय में संविधान के 66वें स्थापना दिवस और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के 125वीं जयन्ती के अवसर पर ‘भारतीय संविधान का निर्माण और उसकी समकालीन प्रासंगिकता‘ विषय पर बोलते हुए अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति महोदय आचार्य रणवीर चन्द्र सोबती ने  लोगों से आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों को वास्तविक स्वरूप प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प हों। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय, राजनीति शास्त्र विभाग के आचार्य विद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि लोकतंत्र एक ढ़ाचा ही नही बल्कि एक सोच और व्यवहार का विषय भी है। डाॅ0 अम्बेडकर और पंडित जवाहर लाल नेहरू दोनों ने ही भारत की तात्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए एक मजबूत लोकतांत्रिक केन्द्र बनाने पर सहमत थे। डाॅ0 अम्बेडकर स्वयं प्रारूप समिति के अध्यक्ष होते हुए भी कभी अपने को अध्यक्ष के रूप में नहीं देखा, बल्कि वे समिति के समन्वयक के रूप में सदैव ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक लोकतंत्र तभी सफल होगा, जब सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की पूर्ण स्थापना होगी। यह सच है कि सिर्फ एक वोट से लोकतंत्र नहीं चलता बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता और स्वतंत्रता लोकतंत्र के मेरूदंड हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के मानक प्रो0 रमेश दीक्षित ने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर का योगदान यह है कि उन्होंने देश को एक ऐसा संविधान दिया जो विगत 66 वर्षों से निरंतर भारतीय जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरा है। एशिया में कुछ ही देश ऐसे हैं जहाँ संवैधानिक लोकतंत्र सफलतापूर्वक जनता की आकांक्षाओं पर खरा है। भारतीय संविधान ने लोगों को समानता के साथ-साथ विचार व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समानता, व्यक्ति की गरिमा, एकता और अखण्डता एवं सामाजिक न्याय को सुनिश्चित किया है। लोकतंत्र सार्थक तभी होता है जब वह जनमानस को सामाजिक मनोवैज्ञानिक और आर्थिक स्वतन्त्रता व समानता प्राप्त हो।
दिल्ली विश्वविद्यालय के मानद प्रो0 महेन्द्र प्रताप सिंह ने भारतीय लोकतंत्र के बारे में पाश्चात्य विचारकों द्वारा किये गये भविष्यवाणी कि भारतीय विविधता के कारण लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता है, का खंडन किया और भारतीय लोकतंत्र की सफलता का श्रेय समाज के दबे कुचले और महिलाओं की भागीदारी और धैर्य को दिया। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद कुछ देशों में लोकतंत्र सफल हुआ है जिसमे जापान, श्रीलंका मलेशिया और भारत है जहाँ 66 वर्षों से लोकतंत्र सफलतापूर्वक सामाजिक न्याय को सुनिश्चित किया यद्यपि भारतीय लोकतंत्र आज भी अनेक औपनिवेशिक समस्याओं से जूझ रहा है।
प्रो0 आर0 बी0 राम, निदेशक, सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति केन्द्र ने भारतीय संविधान निर्माण और उसकी प्रासंगिकता मे डाॅ0 अम्बेडकर के योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का विषय प्रर्वतन प्रो0 रिपु सूदन सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं समन्वयक लोक प्रशासन कार्यक्रम ने कहा कि संविधान दिवस हमें अवसर देता है कि हम देखें कि संविधान ने देश को किस दिशा में अग्रसर किया। कार्यक्रम का संचालन, एम0ए0, लोकप्रशासन की छात्रा आकांक्षा वर्मा ने किया। इस अवसर पर डाॅ0 शिप्रा के नेतृत्व मे सार्थक, शादान, शिखर, शिवांगी, अंकिता, निधि प्रकाश, शरद जायसवाल ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया और संविधान की प्रस्तावना का पाठ प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन राजनीति विज्ञान विभाग के आचार्य प्रो0 सार्थिक बाघ ने किया इसमें डाॅ0 प्रीति चैधरी व सिद्धार्थ मुखर्जी, डाॅ0 धर्मेन्द्र, डाॅ0 शिव शंकर, आनन्द, संदीप, निजी सचिव, राम कुमार गुप्ता उपस्थित रहे और डाॅ0 अफीफा ने विषय प्रवेश किया इस कार्यक्रम में लोकप्रशासन, हिन्दी व राजनीति विज्ञान विभाग  के छात्र एवं छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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