
नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार ने पीओके में भारतीय सेना द्वारा अंजाम दिए गए सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े किसी भी सबूत को जारी ना करने का फैसला किया है. सरकार का मानना है कि सबूत सामने आने से पाकिस्तानी सेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लेकिन सरकार ऐसा नहीं करना चाहती.
बता दें कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के साथ मीटिंग की थी जिसमें सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के सारे सबूत रक्षा मंत्रालय को सौंप दिए थे.
अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, कुछ सरकारी सूत्रों ने कहा है कि इस वक्त भारत युद्ध करने के समर्थन में नहीं है. लेकिन अगर फिर भी युद्ध के हालात बनते हैं तो भारत लड़ने और जीतने के लिए तैयार है. सरकारी सूत्र ने यह भी कहा कि भारत को सर्जिकल स्ट्राइक पर कूटनीतिक समर्थन भी मिला क्योंकि किसी भी देश ने हिंदुस्तान के इस कदम का विरोध नहीं किया.
पाकिस्तान के सबसे करीबी माने जाने वाले चीन ने भी इस मामले पर कोई विरोध दर्ज नहीं किया. इतना ही नहीं बहुत से इस्लामिक देशों की तरफ से आने वाले बयान भी भारत के समर्थन में थे.
गौरतलब है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर जमकर बयानबाजी और राजनीति हुई थी. कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ऑपरेशन को फर्जी बताया तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसके सबूत मांग लिए. इस तरह की बातों पर सरकार ने अभी तक फैसला नहीं लिया है कि वो इस ऑपरेशन का वीडियो जारी करें या नहीं.
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