मोदी सरकार रेंटल हाउसिंग स्कीम लाकर मकान किराए पर देने को बढ़ावा देगी


 

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देश में तेजी से बढ़ते जा रहे शहरीकरण और इससे शहरों में बढ़ रही आवास की समस्या को देखते हुए सरकार का इरादा इसका समाधान लोगों को ज्यादा संख्या में किराए के घर उपलब्‍ध कराकर निकालना चाहती है। इसलिए जल्द ही मोदी सरकार रेंटल हाउसिंग स्कीम को बढ़ावा देने वाली नई नीति की घोषणा करने जा रही है। में सरकार देश के ग्रामीण इलाकों से शहरों में भारी

तादाद में आ रहे लोगों को आवास सुविधा मुहैया करवाएगी। देश में 2011 में हुई पिछली जनगणना के आंकड़े आवास के मामले में एक विचित्र तस्वीर पेश करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादा मांग वाले शहरों में एक ओर एक करोड़ 90 लाख आवासों की कमी है। दूसरी ओर अन्य इलाकों में इतने ही यानी 1.90 करोड़ घर खाली पड़े हैं।

केंद्रीयआवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम वेंकैया नायडू ने यह जानकारी रेंटल हाउसिंग एंड नेशनल हाउसिंग एंड हैबिटेट पॉलिसी पर आयोजित एक कार्यशाला में दी। नायडू ने बताया कि हालांकि इन आवासों के खाली पड़े रहने के कारणों का आकलन कर पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन यह महसूस किया जा रहा है कि इसके पीछे कम किराया मिलना, किरायेदार से मकान वापस लेने से जुड़ी चिंता, इन्सेंटिव का अभाव जैसे कई कारण हो सकते हैं।

फिलहाल देश में करीब 1.90 लाख घरों की कमी है। अगर इन खाली पड़े मकानों को किराए पर लगा दिया जाए, तो घरों की कमी कुछ हद तक तो दूर की जा सकती है। केंद्र सरकार इसके लिए एक रेंटल हाउसिंग प्रोग्राम लाने की कोशिश में जुटी है, जो खाली पड़े एक करोड़ 10 लाख 90 हजार घरों को कवर करेगी। आवास की कमी से जूझने वाले लोगों में 56 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से हैं, जिनकी सालाना आमदनी औसततन 1 लाख रुपये तक की ही है।

इसी तरह 40 फीसदी लोग निम्न आय समूह (एलआईजी) से हैं, जिनकी सालाना औसत आमदनी 1 से 2 लाख रुपये के बीच है। आवास की कमी से जूझ रहे करीब 96 फीसदी लोग ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के तहत आते हैं। इससे पता चलता है कि अलग-अलग वर्ग में आवास की मांग और आपूर्ति में तालमेल नहीं है। इसलिए कम आमदनी वाले लोगों की बड़ी आबादी के लिए रेंटल हाउसिंग स्कीम की जरूरत है।

नायडू ने कहा कि सरकार केवल नई नीति ही नहीं घोषित करेगी, बल्कि रेंटल हाउसिंग प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए सरकार एक प्रोत्साहन नीति भी बनाएगी। साथ ही इस नीति में इसमें देश में एक वातावरण तैयार करने और रेंटल हाउसिंग को प्रोत्साहित करके सरकारों और रेग्युलेटरी एजेंसियों को विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इनमें हाउसिंग सेक्टर के अध्ययन से लेकर लीगल और रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क, टैक्सेशन, इन्सेंटिव, और नीतिगत उपायों तक को शामिल किया जाएगा।


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