
मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की
पुस्तिका ‘एक साल की सफल कहानी’ का विमोचन किया
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां योजना भवन में बाढ़ के प्रति 24 अतिसंवेदनशील तथा 16 संवेदनशील जिलों में सम्भावित बाढ़ से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की मुख्यमंत्री ने समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने सभी सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों, बंधों आदि का समय से पूर्व विभिन्न विभागों के जनपदीय अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी जिलाधिकारी जनपद स्तर पर बाढ़ तैयारियों की समीक्षा करें, ताकि तैयारियों में कोई कमी न रह जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील तथा क्षतिग्रस्त बंधों की मरम्मत का काम 15 जून, 2018 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों, जिनमें राहत एवं बचाव कार्य शामिल हैं, में धन की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने सिंचाई मंत्री एवं सिंचाई राज्य मंत्री को बाढ़ के सम्भावित जिलों का दौरा कर वहां बाढ़ से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की स्वयं समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी तैयारियों की साप्ताहिक/पाक्षिक समीक्षा की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए वार्षिक कार्य योजना 31 मई, 2018 तक पूरी कर ली जाए। बाढ़ से निपटने के लिए कराए जाने वाले कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। ऐसे में बाढ़ से निपटने की तैयारियों में कोई भी कमी अक्षम्य होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आज बुलायी गयी इस बैठक का यही उद्देश्य है कि बाढ़ की तैयारियों को सही एवं प्रभावी ढंग से किया जाना सुनिश्चित हो सके। यदि बाढ़ से निपटने की तैयारियां ठीक से की जाएं और इससे निपटने की पहले से योजना तैयार की जाए तो इससे होने वाली जनहानि सहित अन्य नुकसानों को काफी कम किया जा सकता है।
कहा कि बाढ़ जैसी विभीषिका से निपटने के लिए पहले से तैयारियां किया जाना तथा योजना बनाना बहुत आवश्यक है। बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के लिए नावों की व्यवस्था पहले से कर ली जाए। जहां नावें मौजूद हैं, उनका निरीक्षण कर लिया जाए और आवश्यकता होने पर उनकी मरम्मत करवा ली जाए। यह कार्य हर हाल में 31 मई, 2018 तक पूरा कर लिया जाए। नाव के संचालन के लिए नाविक एवं स्थान का चिन्हीकरण कर लिया जाए। यदि पिछले वर्ष की सेवाओं के लिए नाविकों का भुगतान शेष हो तो उनका भुगतान शीघ्र करा दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष औसत से अधिक वर्षा का अनुमान है। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए सारी तैयारियां की जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में लोगों के लिए प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोमैक्स का अभी से इंतजाम किया जाए। उन्होंने तटबंधों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि नदियों द्वारा रास्ता बदलने की स्थिति से निपटने के लिए उनकी डेªजिंग करायी जाए। जिन क्षेत्रों में हर वर्ष बाढ़ आती है, उनके लिए ठोस योजनाएं बनायी जाएं। सिंचाई विभाग की जो योजनाएं भूमि अधिग्रहण में समस्या के चलते आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के दौरान केन्द्रीय मौसम विभाग, केन्द्रीय जल आयोग, रिमोट सेंसिंग सेण्टर के अधिकारियों द्वारा बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों के विषय में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राजस्व ने बाढ़ की स्थिति में की जाने वाली राहत वितरण की तैयारियों के विषय में मुख्यमंत्री को अवगत कराया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद, कृषि, पशुपालन एवं गृह विभाग के प्रमुख सचिवों ने भी अपने-अपने विभागों द्वारा की जा रही तैयारियों के विषय में जानकारी दी।
इस अवसर पर महराजगंज के जिलाधिकारी से मुख्यमंत्री ने रोहिन नदी के तटबंध की मरम्मत की जानकारी ली। उन्होंने इस कार्य की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को देने के निर्देश दिए। उन्होंने कुशीनगर के जिलाधिकारी को अपने जनपद में बाढ़ नियंत्रण के लिए चलायी जा रही सभी परियोजनाओं की गहन समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने गोरखपुर के जिलाधिकारी को भी जनपद में मौजूद तटबंधों के रख-रखाव और मरम्मत की समीक्षा करते हुए इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। बस्ती के जिलाधिकारी को जनपद से निकलने वाली नदी की डेªजिंग के निर्देश दिए। उन्होंने बहराइच की जिलाधिकारी को बचाव कार्यों की तैयारियों में तेजी लाने और आवश्यकतानुसार लकड़ी की नावों के निर्माण के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका ‘एक साल की सफल कहानी’ का विमोचन भी किया। इस मौके पर सिंचाई मंत्री श्री धर्मपाल सिंह तथा बाढ़ नियंत्रण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती स्वाती सिंह, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सिंचाई, विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारीगण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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