
लखनऊ,। विधानसभा सदन के अंदर तीसरी आंख तो लगा दी गई लेकिन उसे बंद ही रखा जाता है। इस दौरान कोई भी आए जाए कुछ पता नहीं चलता। सदन के अंदर लगे छह कैमरों को सत्र शुरू होने के महज आधा घंटे पहले ही चालू किया जाता है। जबकि उससे पहले वहां कोई भी कर्मचारी पहुंच कर कोई भी हरकत कर दें जानकारी नहीं हो सकती। इतना ही नहीं सदन में लगे छह कैमरों में पांच कैमरे लाइव करते हैं जबकि एक ही कैमरा रिकार्डिंग के लिए रखा गया है।
विधानसभा सदन में मिले पीईटीएन बिस्फोटक मिलने के जहां कई तरह के सवाल उठ रहे हैं वहीं सुरक्षा में हुई बड़ी चूक की भी पोल खुल गई है। सदन के कैमरों को ही बंद रखा जाता है। जबकि सुरक्षा के लिहाजा से कैमरों को 24 घंटे चालू रहना चाहिए। आलम यह है कि अंदर लगे छह कैमरों को सत्र शुरू होने से महज आधा घंटे पहले ही शुरू किया जाता है। उससे पहले सदन के अंदर कौन आया गया किसी को पता नहीं चल सकता। यही वजह है कि मामले को तीन दिन बीत गए हैं लेकिन जांच में जुटी एटीएस अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। हालांकि उसे कुछ तथ्य हाथ जरूर लगे हैं जिनके सहारे वह मामले की सच्चाई पता करने में लगी है। पीईटीएन नामक बिस्फोटक मिलने के बाद जांच में जुटी एटीएस को शनिवार को विधानभवन के अंदर फिर से सफेद पाउडर मिला। जिसके बाद वहां हड़क प मच गया। हालांकि बाद में पता चला यह सफेद पाउडर सफाई के लिए आया था जिसे मैगनीशियम सल्फेट कहते हैं। तब जाकर जांच एजेंसियों ने राहत की सांस ली। सदन के अंदर सिर्फ मार्शल और सफाई कर्मचारी ही प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा अंदर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं होती। हालांकि विधायक भी बिना जांच कराए सदन के अंदर आते-जाते हैं। यहां तक कि उनके आने-और जाने का भी समय निर्धारित नहीं होता। बताया जाता है कि कभी कभी विधायक इतना जल्दी सदन आ जाते हैं कि वहां सफाई ही चल रही होती है।
सचिवालय सूत्रों का कहना है कि इस हरकत के पीछे किसी अंदर के ही व्यक्ति का हाथ है। जिसके जरिए किसी बाहरी व्यक्ति ने बिस्फोटक अंदर पहुंचाया है। कारण है कि अंदर काम करने वाले व्यक्ति को ही विधानसभा के अंदर की खामियों का पता होता है। इसी खामी का फायदा उठाकर ऐसी नापाक हरकत को अंजाम दिया गया है। विधानसभा सदन के अंदर पीईटीएन बिस्फोटक मिलने के बाद पांच बार डीजीपी मु यालय में बैठक की जा चुकी है। वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ भी एक बार सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर मामले के खुलासे का निर्देश जारी कर चुके हैं।
उधर मामले की जांच कर रही एटीएस टीम तीन दिनों के अंदर तीन बार अपनी जांच कर चुकी है जबकि एक बार एनआईए टीम ने जांच की। लखनऊ। विधानसभा सदन के अंदर पीईटीएन बिस्फोटक मिलने के बाद सीएम योगी सख्त हुए तो विधानसभा की सुरक्षा में लगी एटीएस की क्विक रिस्पांस टीम क्यूआरटी एक्टिव हो गई। करीब 20 कमांडों के साथ क्यूआरटी टीम विधानसभा का कोना-कोना खंगालने के बाद नए सिरे से पड़ताल में जुटी हुई है। यही वजह थी कि शनिवार को एटीएस की क्विक रिस्पांस टीम क्यूआरटी अपने 20 कमांडों दस्ते के साथ विधानसभा के अंदर एक मॉक ड्रिल शुरू की। इसमे पुलिस फोर्स के अलावा दमकल विभाग भी शामिल हुआ। मॉकड्रिल में क्यूआरटी ने किसी भी आतंकी वारदात या ऐसी किसी भी परिस्थिती से निपटने के लिए जोर आजमाईश की। मॉक ड्रिल टीम ने विधानसभा के सभी गेटों से लेकर अंदर तक की हलचल के दौरान एक्शन में आने का अपना रिस्पांस टाइम भी चेक किया।
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