सांप भी मरा और लाठी भी बची


azam_khan_20130211नगर विकास मंत्री आजम खां की धर्मपत्नी तनीज फातिमा ने आखिरकार नेताजी का बात रख ली और राज्यसभा के लिए पर्चा भर दिया, लेकिन इससे पहले पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए नामजद किए जाने पर उन्होंने जो रणनीति अपनायी उसने यह दिखा दिया कि शोशबाजी में वह अपने शौहर से किसी कदर उन्नीस नहीं बैठती। मोहतरमा ने पार्टी को चिटठी लिखी कि उनकी सांसदी की कोई इच्छा नहीं है सो पार्टी चाहे तो किसी और काबिल शख्स को यह मौका दे दे। यह खबर भी पढऩे को मिली कि मैडम (सपा में होने के बावजूद) वंशवादी राजनीति से इत्तिफाक नहीं रखतीं। अपनी चिट्ïठी से उन्होंने टिकट ‘ठुकराने’ के लिए सुर्खियां बटोर लीं लेकिन गुंजायश का दरवाजा यह भी कहकर खुला रखा कि हर सूरत में ‘नेताजी’ का आदेश सिर माथे रहेगा। ‘नेताजीÓ का आदेश न बदलना था, न बदला। मैडम ने पर्चा भर दिया और संकेत भी दे दिया कि भले ही वह सपा सांसद कहलायेंगी लेकिन पार्टी द्वारा उन्हें ‘फार ग्रान्टेडÓ नहीं लिया जा सकता। और यह भी कि राजनीति की बिसात पर उन्हें निरी अनाड़ी खिलाड़ी न समझा जाये। वह ऐसा पैंतरा जानती हैं जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे।


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