पदोन्नति में आरक्षण लागू करने के केन्द्र सरकार के आदेश के विरोध में चेतावनी दौड़ में सम्मिलित हुए हजारों लोग


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lucknow |  सर्वजन हिताय संरक्षण समिति उप्र के आह्वान पर आज 1090 चैराहे से राजीव चैक तक हजारों लोगों ने चेतावनी दौड़ में सम्मिलित होकर केन्द्र सरकार के पदोन्नति में आरक्षण लागू करने के आदेश का जोरदार विरोध किया। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 15 जून को पदोन्नति में आरक्षण देने का आदेश जारी किया है जिसमें राज्य सरकारों को भी पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए कहा गया है। उप्र सहित देश भर के तमाम कर्मचारियों, अधिकारियों और शिक्षकों में केन्द्र सरकार के इस आदेश से काफी आक्रोश व्याप्त है। 1090 चैराहे से प्रारम्भ हुई चेतावनी दौड़ का नेतृत्व भारतीय वायु सेना के सेवा निवृत्त एअर मार्शल 80 वर्षीय आर के दीक्षित ने किया।

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 17 जून 1995 को पहली बार संविधान संशोधन कर पदोन्नति में आरक्षण दिया गया था इसीलिए 17 जून को देशभर में सभी प्रान्तों की राजधानियों में 17 जून को काला दिवस मनाया जा रहा है और विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ में चेतावनी दौड़ का आयोजन किया गया। चेतावनी दौड़ में बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी, शिक्षक, अधिवक्ता, छात्र, बुद्धिजीवी और आम नागरिक सम्मिलित हुए। चेतावनी दौड़ प्रारम्भ होने के पहले सभी प्रतिभागियों ने शपथ ली कि 21वीं शताब्दी में सशक्त भारत का सपना साकार करने हेतु पदोन्नति में आरक्षण का हर स्तर पर प्रबल विरोध किया जायेगा। यह भी निर्णय लिया गया कि जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर मांग की जायेगी कि वे या तो केन्द्र सरकार से पदोन्नति में आरक्षण का आदेश वापस करायें अन्यथा त्याग पत्र दें। समिति का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के पहले जारी घोषणा पत्र में यह उल्लेख नहीं किया था कि सत्ता में आने के बाद पदोन्नति में आरक्षण दिया जायेगा। अतः घोषणा पत्र से इतर जाकर पदोन्नति में आरक्षण देने का आदेश जारी करना जनता के साथ विश्वासघात है। वोट की सस्ती राजनीति के लिए पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की वोट की राजनीति का देश के 03 करोड़ कर्मचारी और उनके परिवार वोट से ही करारा जवाब देंगे।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण देने हेतु केन्द्र सरकार ने मा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की गलत व्याख्या की है। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार एम नागराज मामले में दिये गये तीन बाध्यकारी कारणों को नजरअंदाज कर पदोन्नति में आरक्षण देना असंवैधानिक है। इस प्रकार केन्द्र सरकार का 15 जून का आदेश पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व भी पदोन्नति में आरक्षण देने हेतु केन्द्र सरकार चार बार संविधान संशोधन कर चुकी है। कर्मचारियों, अधिकारियों और शिक्षकों का संकल्प है कि अब पांचवी बार संविधान संशोधन नहीं होने दिया जायेगा। समिति ने ऐलान किया कि पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की केन्द्र सरकार की नीति के विरोध में सुप्रीम कोर्ट से सड़क तक जन आन्दोलन चलाया जायेगा।

चेतावनी दौड़ में सम्मिलित लोग टी-शर्ट पहने थे जिसपर लिखा था – पदोन्नति में आरक्षण-स्वीकार्य नहीं स्वीकार्य नहीं और ज्येष्ठता व श्रेष्ठता का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान।

चेतावनी दौड़ में एअर मार्शल आर के दीक्षित, शैलेन्द्र दुबे, ए ए फारूकी, एच एन पाण्डेय, राजीव सिंह, एस एस निरंजन, राम प्रकाश, राम राज दुबे, कमलेश मिश्र, रीना त्रिपाठी, प्रेमा जोशी, अजय तिवारी, राजीव श्रीवास्तव, वाई एन उपाध्याय, राजेश अवस्थी, आंेमकार नाथ तिवारी, शिव गोपाल सिंह, ए के मिश्रा, बी बी सिंह, देवेन्द्र द्विवेदी, नौशाद अहमद, अखिलेश्वर सिंह, हरिशंकर, आरती प्रसाद सिंह, अश्वनी उपाध्याय, आर बी एल यादव, शिव प्रकाश दीक्षित, अश्वनी उपाध्याय, आर के पाण्डेय मुख्यतया उपस्थित थे।


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