
महाविद्यालय प्रबन्धको के दबाव में शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़ा की जांच और डाटा आंनलाइन की प्रक्रिया डाली गयी ठण्डे बस्ते में
अनुमोदित शिक्षक संघ ने किया मांग : अविलम्ब हो शिक्षको का भौतिक सत्यापन,शिक्षक विहीन कालेजो में प्रवेश किया जाय प्रतिबन्धित
lucknow | अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.मनोज दीक्षित द्वारा स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धन के आगे घुटना टेकते हुए अपने द्वारा ही दिये गये बयानो व आदेशो से मुकरते हुए लाचार दिख रहे है। आखिर कुलपति अवध विश्वविद्यालय द्वारा ही कहा गया था कि अवध विश्वविद्यालय में 423 प्राचार्य विहीन महाविद्यालय, 162 शिक्षक विहीन महाविद्यालय,171 ब्लैकलिस्टेड महाविद्यालय एवं 20 हजार फर्जी शिक्षक हैं। लेकिन सवाल यह हैकि कुलपति महोदय को प्राचार्य शिक्षक विहीन एवं बलैकलिस्टेड व फर्जी शिक्षको का संज्ञान मात्र परीक्षा के समय ही याद आता है या फिर सत्र 2018-19 की प्रवेश प्रक्रिया के समय भी याद हैकि कितने कालेजो में प्राचार्य व शिक्षक है या कितने में नहीं है ? यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा भी ऐसे महाविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं ।
मुख्य परीक्षा परिणाम-2018 के अवलोकन से स्पष्ट हैकि शिक्षक विहीन महाविद्यालयों के छात्र बिना पढाई हुए ही कैसे उत्तीर्ण हो गये है ? निसंदेह या तो विश्वविद्यालय सचलदल का रहमोकरम रहा होगा या फिर प्राचार्य/केन्द्राध्यक्षो की संलिप्तता ?
विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित अद्यतन अनमोदित शिक्षक सूची के अनुसार आज की तिथि में मात्र 440 कालेजो द्वारा ही अपने महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षको का कागजी विवरण विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया है। इनमें से भी धरातल पर कितने कार्यरत मिलते है यह भी भगवान भरोसे ही है। क्यों कि प्राप्त सूचनाओ के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित सूची में महाविद्यालयों द्वारा ऐसे ऐसे शिक्षको को महाविद्यालय में कार्यरत दिखा कर कागजी कोरम पूरा कर दिया है, जो विगत कई वर्षो व कभी भी महाविद्यालय में कार्यरत ही नहीं हुए।
विश्वविद्यालय सूची के अनुसार कुल 840 महाविद्यालय है। जिनमें से जनपद प्रतापगढ के महाविद्यालयों के इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय में मिल जाने एवं जनपद श्रावस्ती तथा बलरामपुर के महाविद्यालयों का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में शामिल हो जाने से अवध विश्वविद्यालय में 630 महाविद्यालयों में से अभी तक कुल 441 महाविद्यालयो द्वारा ही कुल 4415 अनुमोदित शिक्षको का विवरण दिया गया है। इनमें भी यदि 21 अनुदानित महाविद्यालय एवं 07 राजकीय कालेजो को छोड़ दे तो 108 ऐसे महाविद्यालय है जिनमें अभी तक अनुमोदित प्राचार्य ही नहीं है व 179(शिक्षक विहीन) महाविद्यालयों द्वारा अनुमोदित शिक्षिको का कोई विवरण ही नहीं दिया गया है। जिन महाविद्यालयों के द्वारा अनुमोदित प्राचार्य व शिक्षिको का विवरण दिया भी गया है उनका यदि विश्वविद्यालय द्वारा स्थलीय भौतिक सत्यापन करवाया जाता है तो 45% अनुमोदित प्राचार्य व शिक्षक मात्र कागजी शोभा बढाने के लिए ही दर्शाये गये है।
यह कितना हास्यास्पद हैकि जिन महाविद्यालयों ने अनुमोदित शिक्षिको का कोई विवरण ही विश्वविद्यालय सूची में अग्रेषित नहीं किया गया है, तो ऐसे ही शिक्षक वहीन महाविद्यालयो से मुख्य परीक्षा-2018 में हजारों छात्रो का परीक्षा परिणाम कैसे जारी किया गया है ??। ऐसे सैकड़ों महाविद्यालय है जिनका नाम विश्वविद्यालय की अनुमोदित शिक्षक सूची में ढूढने पर भी नहीं मिलेगा,लेकिन परीक्षा परीक्षा परिणाम-2018 की लिस्ट में जरुर शामिल है।
राज्यपाल व मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षामंत्री के बार बार के आदेशो व निर्देशो के बावजूद कुलपति अवध विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धन के दबाव में अभी तक न तो ऐसे महाविद्यालयों के शिक्षको का भौतिक सत्यापन करवा रहे है और न ही कोई कठोर निर्णय ही ले पा रहे है। जिसके कारण शिक्षक विहीन महाविद्यालयों द्वारा बड़े बड़े विज्ञापनो का सब्जबाग दिखा कर सत्र 2018-19 के लिए धड़ल्ले से छात्रो का प्रवेश लिया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा इस सन्दर्भ में अभी तक कोई आदेश तक जारी नहीं किया जा सका कि शिक्षक विहीन महाविद्यालय किसी भी दशा में अपने महाविद्यालयों में छात्रो का प्रवेश न लें। इस प्रकार ऐसे शिक्षक विहीन महाविद्यालय इधर छात्रो का प्रवेश जब कर लेगे तो फिर छात्र हित का पाखंड रचाकर बाद मे कुलपति द्वारा परीक्षा की अनुमति भी प्रदान कर दी जायेगी।
जिसके सन्दर्भ में अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सह विभाग प्रमुख डां.जितेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कुलपति अवध विश्वविद्यालय से मांग किया हैकि विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित अनुमोदित शिक्षक सूची के अनुरूप अविलम्ब भौतिक सत्यापन करवाकर ही महाविद्यालयों को प्रवेश की अनुमति प्रदान किया जाय। और प्राचार्य एव शिक्षक विहीन महाविद्यालयों को किसी भी दशा में सत्र 2018-19 में प्रवेश की अनुमति कदापि प्रदान न किया जाय, अन्यथा की स्थिति में अनुदानित महाविद्यालय अनुमोदित शिक्षक संघ कुलपति के निर्णय के विरुद्ध व्यापक आन्दोलन करने के लिए वाध्य होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी कुलपति अवध विश्वविद्यालय की होगी।
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