
मुख्य सचिव की जापानी दूतावास के मिनिस्टर (इकोनाॅमिक एण्ड डेवलपमेंट) के साथ बैठक
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राजीव कुमार ने उत्तर प्रदेश में जापान के सहयोग से अवस्थापना परियोजनाओं जैसे वाराणसी के गंगा एक्शन प्लान, आगरा में जलापूर्ति परियोजनाओं तथा वन व्यवस्था के लिये किये जा रहे सहयोग में और अधिक तेजी लाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा के विकास एवं अनुसूचित जाति के उत्थान के लिये कुटियावा व अम्बेडकर नगर में प्राइमरी पाठशाला खोलने तथा गोरखपुर के फातिमा अस्पताल में चिकित्सीय उपकरणों का प्राविधान सुनिश्चित कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करायी जायें। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास परियोजनाओं में और अधिक गति लाने हेतु जापानी कम्पनीज इन एशिया में निवेश करने हेतु प्रदेश सरकार नियमानुसार आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करायेगी। उन्होंने कहा कि आगामी 21 एवं 22 फरवरी को प्रदेश में आयोजित इनवेस्टर्स मीट के आयोजन पर जापान के अधिक से अधिक उद्यमी भी भाग लेकर प्रदेश के विकास में अपने निवेश में भागीदारी सुनिश्चित करायें।
मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में जापानी दूतावास के मिनिस्टर (इकोनाॅमिक एण्ड डेवलपमेंट) के साथ बैठक कर प्रदेश की विकास योजनाओं में निवेश किये जाने हेतु विचार-विमर्श कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दैवीय आपदा से बचाव हेतु यूनिवर्सिटी आॅफ डिजास्टर मैनेजमेेंट की स्थापना जापान के सहयोग से कराने हेतु परीक्षण कराकर आवश्यक कार्यवाही नियमानुसार सुनिश्चित करायी जाये।
जापानी दूतावास के मिनिस्टर (इकोनाॅमिक डेवलपमेंट) श्री केन्को सोने ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निवेदन पर जापान के प्रधानमंत्री श्री शिंजो अबे वाराणसी कन्वेंशन सेण्टर में अपना सहयोग देने के लिये तैयार हुये हैं, जो कि प्रधानमंत्री एवं शिंजो अबे की दोस्ती का प्रतीक होगा। जापान इस योजना में अपना पूरा सहयोग देने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार तथा नगर निगम वाराणसी से सहयोग की अपेक्षा रखती है। उन्होंने कहा कि जापानी भाषा प्रोग्राम को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय मंे तथा आपदा प्रबंधन में जन सहभागिता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से क्योटो-वाराणसी पार्टनर्शिप के तहत दोनों देशों के बीच इंटेनशन डाक्युमेंट 2014 पर हस्ताक्षर तथा पर्यावरण गोष्ठी नवम्बर, 2015 का आयोजन किया गया।
श्री केन्को सोने ने बताया कि स्वच्छ गंगा-स्वच्छ भारत के तहत जापान द्वारा गंगा एक्शन प्लान परियोजना का क्रियान्वयन कराया जा रहा है, जिसके तहत सीवेज ट्रीटमेंट सुविधा व सार्वजनिक शौचालयों का प्राविधान शामिल है। जापान इसी तरह की योजना को गंगा के किनारे साथ अन्य शहरों में विस्तारित करने के लिये तैयार है और इस परिप्रेक्ष्य में जापान की उन्नत तकनीक उपयोग करने के लिए तैयार है। जापान के पास सेप्टिक टैंक की एक उन्नत प्रणाली जोहकासोउ है, यह सीवेज ट्रीटमेंट फैसिलिटीज का उन्नत विकल्प है। उन्होंने बताया कि जापान के पास कोल थर्मल पाॅवर प्लांट्स के लिये पर्यावरणीय उपरकण में उन्नत तकनीक और अनुभव है, जो कि एसओएक्स, एनओएक्स स्मोक पार्टिकल्स को अच्छी तरह से साफ कर सकता है तथा वर्तमान संयंत्र में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
जापानी दूतावास के मिनिस्टर (इकोनाॅमिक डेवलपमेंट) ने बताया कि जापान की मिक्सविशी और तोशिबा कम्पनी द्वारा 1980 में जापान के आधिकारिक विकास सहायक द्वारा वित्तपोषण से बना अनपरा कोयला थर्मल पावर प्लाण्ट वर्तमान समय में भी अच्छी स्थिति में है। उन्होंने एन0एच0आई0 द्वारा ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे (ई0पी0ई0) के तेजी से निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कि इससे जापानी कम्पनियों को एन0सी0आर0 और नोएडा में व्यावसायिक वातावरण बेहतर मिलेगा।
श्री केन्को सोने ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जापानी भाषा की शिक्षा 2016 में प्रारम्भ करने पर भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि इससे आई0आई0टी0, कानपुर और टोक्यो विश्वविद्यालय ने पारस्परिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार करेंगे, जिससे ज्यादा से ज्यादा जापानी टूरिस्ट भारत में बुद्धिष्टि सर्किट का भ्रमण करें।
बैठक में प्रमुख सचिव पशुधन श्री सुधीर एम0बोबडे, प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री आलोक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री प्रशांत त्रिवेदी सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
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