U P.में बिजली परियोजनाओं के लिए आवंटित 1172 करोड़ में सिर्फ खर्च हो सके 309 करोड़


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लखनऊ। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में दूसरे व तीसरे चरण के चुनाव करीब आ रहे हैं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ऐतिहासिक शहर लखनऊ व उसके आसपास के इलाकों में रोजाना चैबीसों घंटे बिजली आपूर्ति के लंबे-चैड़े दावे कर रहे हैं। लेकिन हकीकत राज्य सरकार के दावों के विपरीत है। शहर में बिजली की निर्बाध व उत्तम आपूर्ति के लिए केन्द्रीय बिजली मंत्रालय ने जो रकम मंजूर की थी समाजवादी पार्टी की सरकार उसका उपयोग करने में नाकाम रही है। नतीजतन, यहां के निवासी और कारोबारी दोनों ही बिजली की किल्लत से परेशानी उठा रहे हैं।

नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा बड़ी मात्रा में धन आवंटित किए जाने के बावजूद हालात बद से बदतर हो गए हैं। लखनऊ जिले व इसके आसपास के इलाकों में 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश की नई विधानसभा चुनने के लिए मतदान होगा। केन्द्र सरकार के ऐक्सिलिरेटिड पावर डैवलपमेंट एंड रिफाॅम्र्स प्रोग्राम के तहत लखनऊ जिले के लिए 1172 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने अब तक केवल 309 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं। विद्युत मंत्रालय की इंटिग्रेटिड पावर डैवलपमेंट स्कीम के अंतर्गत लखनऊ शहर के लिए केन्द्र सरकार ने 3 करोड़ रुपए मंजूर किए, परंतु इनमें से अब तक कुछ भी व्यय नहीं हुआ है। इंटिग्रेटिड पावर डैवलपमेंट स्कीम का लक्ष्य है शहरी इलाकों में सब-ट्रांस्मिशन एवं वितरण नेटवर्क का मजबूत करना ताकि गर्मियों में चरम मांग के दौरान बिजली की कटौती न हो और ट्रांस्मिशन नेटवर्क लोड ले सके। जिले के गांवों के विद्युतीकरण की बात आती है तो भी हालात कुछ अलग नहीं हैं।

केन्द्र सरकार ने अपना काम करते हुए लखनऊ के बिजली रहित गांवों में बिजली पहंुचाई किंतु राज्य सरकार उस बिजली को ग्रामीणों के घरों तक ले जाने में बिल्कुल नाकाम साबित हुई है। यद्यपि ने केन्द्र ने दिसंबर 2013 में लखनऊ जिले में ग्रामीण विद्युतिकरण के लिए 120.28 करोड़ रुपए मंजूर किए थे, लेकिन राज्य सरकार की अमलकारी एजेंसी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने प्रोजेक्ट देने में 28 महीने लगा दिए। यह प्रोजेक्ट जुलाई 2016 को दिया गया और अब तक केवल 34.21 करोड़ रुपए या आवंटित रकम का 28 प्रतिशत ही व्यय हो सका है। हालांकि 481 गांवों में गहन विद्युतिकरण की आवश्यकता है किंतु केवल 109 या 23 प्रतिशत में ही ऐसा हो पाया है। इसी प्रकार, गरीबी की रेखा से नीचे के 63,905 घरों में विद्युतिकरण की आवश्यकता है लेकिन महज 2316 या 4 प्रतिशत को ही अब तक बिजली कनेक्शन मिल पाया है। राज्य सरकार के इस ढीले रवैये और तीन साल पहले केन्द्र सरकार द्वारा फंड आवंटित किए जाने के बावजूद परियोजनाओं के निष्पादन में अक्षम रहने के परिणामस्वरूप लोग अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं।


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