उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017: 7 चरणों में होगा चुनाव


 

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पहले चरण का मतदान 11 फरवरी को होगा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख पक्की हो गई है। उत्तर प्रदेश में चुनाव 7 चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण का मतदान, पहले चरण का मतदान 11 फरवरी को होगा। दुसरे चरण का मतदान 15 फरवरी को होगा। तीसरे चरण के लिए 19 फरवरी, चौथे चरण 23 फरवरी, पांचवे चरण के लिए 27 फरवरी, छठे चरण के लिए 4 मार्च को तो वही आखरी चरण के लिए 8 मार्च को होगा। सभी राज्यों में 11 मार्च को नतीजे आयेंगे। उत्तर प्रदेश में इस बार माना जा रहा है दो पार्टियों में कांटे की टक्कर है। एक तरफ समाजवादी पार्टी है तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी है। लेकिन ऐसा नही है की बसपा और कांग्रेस इस रेस में पीछे हैं। लेकिन अहम मुकाबला सपा और बीजेपी में माना जा रहा है। दरअसल इसका एक कारण यह भी है की एबीपी न्यूज़-लोकनीति-CSDS के इस पोल में बहुजन सामजवादी पार्टी प्रमुख मायावती को मुख्यमंत्री पद के लिए दूसरी पसंद हैं। इस दौड़ में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ काफी पीछे छूटते नज़र आ रहे हैं। पोल में 28% लोग अखिलेश यादव, 21% मायावती, 4% आदित्यनाथ और 3% मुलायम सिंह यादव के साथ हैं।

2017-01-03

बता दें उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है और इनमे सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश हैं। अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां विधानसभा की 403 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। लेकिन अगर पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम पर एक नजर डाले तो साल 2014 में समाजवादी पार्टी यूपी में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और उसने 224 सीटों पर विजय हासिल करके पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया था। तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ बसपा दूसरे और भाजपा तीसरे स्थान पर रही। लेकिन कांग्रेस गठबंधन चौथे पायदान पर पहुंच गई थी।

लेकिन उत्तर प्रदेश में चुनावी परिणाम हमेशा से चौकानें वाले रहे हैं जैसे वर्ष 2007 में प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मात्र 22 सीटें ही जीत सकी थी। प्रदेश में सत्तारूढ़ बसपा के सभी 403 सीटों पर, सपा 402, भाजपा 398 और रालोद 46 सीटों पर मैदान में थे। लेकिन इस बार का चुनावी समीकरण काफी हैरान करने वाला हो सकता है।

समाजवादी पार्टी में दंगल

उत्तर प्रदेश में इस समय अगर कोई पार्टीय सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है तो वह समाजवादी पार्टी है। इसका कारण मुलायम बनाम अखिलेश के बीच की जंग है। दुनिया जान रही है की जहां उत्तर प्रदेश में जीत के लिए अन्य दल कोशिश में लगे हुए हैं वहीँ दूसरी तरफ अखिलेश और मुलायम के बीच चुनावी चिन्ह को लेकर दंगल चल रहा है। साल 2014 में अखिलेश को आगे रख के सपा ने युवा नेता पेश किया था और जनता ने उन्हें वोट देकर स्वीकार किया लेकिन इस बार अगर आंतरिक कलह शांत न हुई तो परिणाम विपरीत भी हो सकता है। फिलहाल यह भी कयास लगाया जा रहा था कि कांग्रेस और सपा के साथ हो सकती है लेकिन अब तक इस पर कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नही है।

कांग्रेस के वर्चस्व की लड़ाई

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल होने के बाद कांग्रेस ने अपनी इज्जत तो बचा ली थी। लेकिन इस बार यूपी में उनकी अग्नि परीक्षा है। क्योंकि कई राज्यों में पार्टी को जिस तरह से हार का मुंह देखना पड़ा था उससे उन्हें अब संभल कर कदम रखना होगा। आपको बता दें की कांग्रेस की तरफ से इस बार यूपी मे जनता के बीच पहुंचने का काम राहुल गांधी खुद कर रहे है। इस बार यूपी के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर इसके प्रमुख होंगे। उसके साथ ही पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित और विवादित नेता इमरान मसूद को भी शामिल किया गया।

जीत के उम्मीद से भारतीय जनता पार्टी उतरी मैदान में

बिहार में हार का मुंह देखने के बाद असम में जो जीत मिली उसके बाद अब बीजेपी नई ऊर्जा के साथ यूपी चुनावों में उतरी है। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में केशव प्रसाद मौर्या को अध्यक्ष बनाया है तब से विरोधी पार्टियों के होश उड़े हुए हैं। दरअसल केशव प्रसाद मौर्य बसपा, सपा, कांग्रेस का एक बड़ा वोट बैंक काट सकते हैं। लेकिन इन्ही सब के बीच बीजेपी इस बात से बखूबी जानती है कि जिस तरह से उन्हें बिहार में हार मिली थी उसके बाद बीजेपी को उत्तर प्रदेश में उन्हें मायावती का सामाजिक आधार कमजोर कर, अखिलेश यादव से मजबूत और सक्षम चेहरा ढूंढना होगा। यूपी विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी खुद मंच पर डटे हुए हैं और कोशिश में है की जनता का एक बार फिर भरोसा जीत सके जैसा लोकसभा में हुआ था।

बसपा भी रेस में


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