
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में लगभग 8 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र के विकास की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि विगत सात दशकों से भारत व रूस के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। आजादी के तुरंत बाद भारत की प्रगति में रूस का बड़ा सहयोग रहा है। रक्षा, औद्योगिक तथा परमाणु क्षेत्र में हमें रूस का भरपूर सहयोग मिला है। यह कहना गलत नहीं होगा कि रूस एवं भारत की मित्रता वर्ष दर वर्ष प्रगाढ़ होती गई है तथा हम एक दूसरे के स्ट्रेटजिक पार्टनर के रूप में स्थापित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में भी इस सहयोग के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। वर्ष 1968 में ओबरा तथा 1971 में हरदुआगंज में सोवियत संघ के सहयोग से थर्मल पावर प्लांट का निर्माण किया गया। रूसी कंपनियों ने टेहरी एवं कोटेश्वर हाईड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट के निर्माण में भी सहयोग किया। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) तथा भारतीय कृषि अनुंसधान परिषद (आईसीएआर) जैसी भारत की संस्थाएं कृषि एवं कांट्रैक्ट फार्मिंग के क्षेत्र में सुदूर पूर्वी रूस में कृषि चुनौतियों को दूर करने में सहायक होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत पशुधन के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान है और देश में पशुधन विकास के गतिविधियों को वृहद स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाने, जन सामान्य को निरन्तर शुद्ध एवं पौष्टिक खाद्य प्रदार्थों की उपलब्धता बनाए रखने, तुड़ाई उपरांत क्षति को कम करने तथा किसानों के उत्पाद के उचित मूल्य की प्राप्ति के उद्देश्य से देश में विशाल मात्रा में मेगा फूड पार्क तथा कोल्ड चेन स्थापित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में इस दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अलावा रूस के गवर्नर एवं उप मुख्यमंत्री समेत रूस एवं भारत के कई उद्यमी मौजूद रहे।
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