यूपीसीडा ने अनुपयोगी आवंटित औद्योगिक भूमि को उपयोगी बनाने के लिए अपनी प्रचलित उप विभाजन नीति मे किए आवश्यक परिवर्तन


सीईओ मयूर माहेश्वरी ने कहा कि ये नीतिगत सुधार उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ उद्योग जगत मे व्याप्त समस्याओं का निराकरण करने मे सहायक होंगे


लखनऊ | यूपीसीडा उत्तर प्रदेश मे औद्योगिक परिदृश्य को रूपांतरित करने के उद्देश्य से अपनी नीतियों मे सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है जिससे प्रदेश मे उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्राधिकरण औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए एक नोडल एजेंसी है और अब तक संतुलित तरीके से राज्य के 50 से अधिक जिलों में लगभग 154 औद्योगिक क्षेत्रों का विकसित किया है। अपनी उद्योग हितैषी नितियो के माध्यम से यूपीसीडा उत्तर प्रदेश को रोज़गार सृजित करने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रदेश के रूप मे परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भूखण्डों की उप विभाजन नीति का सरलीकरण करने तथा उद्योग जगत एवं उद्यमियों की लंबे समय से चल रही समस्याओं के समाधान को ध्यान मे रखते हुए प्राधिकरण द्वारा उक्त नीति मे परवर्तन के लिए प्रथमबार जन सामान्य से आपत्ति/सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इस नीति की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए यूपीसीडा ने अन्य राज्यों में उप विभाजन हेतु लागू प्रवधानो का परीक्षण करने के साथ साथ उन राज्यों मे लिए गए जन सामान्य आपत्तियों/सुझावों को भी ध्यान मे रखा है। उक्त प्रस्तावित नीति के क्रियान्वयन होने से लंबे समय से अनुपयोगी आवंटित औद्योगिक भूमि का उपयोग संभव हो पाएगा जिससे प्रदेश मे औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा एवं नए रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा। इसके अतिरिक्त परिवार के मध्य होने वाले उप विभाजन को ध्यान मे रखते हुए तथा उसे और सरल बनाने के उद्देश से प्राधिकरण ने विभिन्न प्रकार की छूट भी प्रदान किए है |

उप विभाजन के नियम/शर्ते:
• पूर्व की नीति के तहत प्राधिकरण की अनिवार्य रूप से बाईबैक कराने की शर्ट को समाप्त करते हुए नए प्रावधानों के तहत अधिकतम 75% भूखंड में उप विभाजन अनुमन्य किया गया है।
• उप विभाजन से पूर्व इकाई के न्यूनतम 5 वर्ष क्रियाशील होने की अनिवार्यता को घटाकर 4 वर्ष किया गया है।
• परिवार के मध्य भूखंड के उप विभाजन में छूट प्रदान करते हुए इकाई के क्रियाशील की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है।
• भूखंड के उप विभाजन हेतु 24 मीटर चौड़ी सड़क की अनिवार्यता को घटाकर 18 मीटर किया गया है तथा परिवार के मध्य उप विभाजन में छूट प्रदान की गई है।

  1. विभाजित भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर से घटाकर साडे 400 वर्ग मीटर किया गया है।
  2. उप विभाजन शुल्क
    • भूखंड के क्षेत्रफल तथा इकाई के आवंटित समय के सापेक्ष उप विभाजन शुल्क स्लैब वार निर्धारित किया गया है।
    • परिवार के मध्य भूखंड के उप विभाजन शुल्क में अतिरिक्त 50% की छूट दी गई है।
    • आवंटी से उप विभाजन शुल्क का 50% आवेदन के समय तथा शेष 50% उप विभाजन हेतु आंतरिक विकास के कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र जारी करने से पूर्व लिए जाने का प्रावधान रखा गया है।
  3. हस्तांतरण शुल्क: एनसीआर के अंतर्गत आने वाले प्राधिकरण के औद्योगिक क्षेत्रों में सर्किल दर या प्रचलित प्रीमियम दर, जो भी अधिक हो, का 15% एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों हेतु 10% हस्तांतरण शुल्क निर्धारित किया गया है। परिवार के मध्य हस्तांतरण शुल्क में छूट प्रदान की गई है।
  4. उप विभाजित भूखंडों के खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए 20% विक्रय हेतु क्षेत्रफल को प्राधिकरण द्वारा कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र जारी करने तक बंधक रखने का प्रावधान किया गया है।
  5. केंद्र अथवा राज्य सरकार की राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं तथा औद्योगिक विकास विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा अनुमोदित मेगा व मेगा प्लस श्रेणी की परियोजनाओं में विभाजन के प्रावधानों में शिथिलता का प्रावधान किया गया है।
  6. यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी ने कहा कि ये नीतिगत सुधार उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ उद्योग जगत मे व्याप्त समस्याओं का निराकरण करने मे सहायक होंगे जिससे प्रदेश मे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और लोगों के लिए रोज़गार के अवसरों का सृजन भी होगा।

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