यूपीसीडा ने कोविड महामारी के दौरान ऑक्सीजन की आपूर्ति आसान करने के लिए उठाए महत्वपूर्ण कदम— सीईओ मयूर महेश्वरी


पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में देवरिया तक, एक विस्तृत “ऑक्सीजन ग्रिड” स्थापित करने की योजना

किसी भी यूपीसीडा कार्यालय में जाए बिना, भूमि के आवंटन या परियोजना परिवर्तन


लखनऊ | ऑक्सीजन निर्माण इकाइयों को प्रोत्साहित करने और उनकी इकाइयों की स्थापना में सुविधाएं प्रदान करने के लिए त्वरित सहायता प्रदान करने के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ के आह्वान को ध्यान में रखते हुए, यूपीसीडा द्वारा पूरे राज्य के सभी क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए, पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में देवरिया तक, एक विस्तृत “ऑक्सीजन ग्रिड” स्थापित करने की योजना है। प्राधिकरण द्वारा राज्य में ऑक्सीजन उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए देश की विभिन्न ऑक्सीजन गैस उत्पादक कंपनियों के साथ बातचीत की जा रही है।यह जानकारी यूपी सीडा के सीईओ मयूर महेश्वरी ने दी ।
उन्होंने बताया कि यूपीसीडा ने युद्ध के स्तर पर ऑक्सीजन ग्रिड स्थापित करने के लिए इस कठिन समय की जरूरतों के अनुसार कई सक्रिय कदम उठाए हैं, जिसमें किसी भी यूपीसीडा कार्यालय में जाए बिना, भूमि के आवंटन या परियोजना परिवर्तन के लिए कहीं से भी 24X7 ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा, कम से कम संभव समय, (आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर), भूमि का आवंटन, ऑक्सीजन पुनर्जनन इकाई स्थापित कर रहे या अपने उत्पाद को संबंधित उत्पादों में बदलने की योजना बना रहे निवेशकों के लिए रिकॉर्ड समय के भीतर सभी अनापत्तियां/ अनुमोदन प्रदान करना, जैसी अभूतपूर्व पहलें और निर्णय शामिल हैं।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, पिछले एक साल में, महामारी की शुरुआत के बाद से, भूजल और बिजली आपूर्ति जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के आधार पर, प्राधिकरण ने अपने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में उपलब्ध सभी भूखंडों का एक भूमि बैंक तैयार किया है और इस संबंध में प्राप्त सभी परियोजना-प्रस्तावों का बारीकी से निगरानी करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप भी बनाया है।
यूपी सीडा के सीईओ मयूर महेश्वरी ने बताया कि यूपीसीडा की इन पहलों का स्वागत करते हुए, ग्रेटर नोएडा, सहारनपुर, शाहजहाँपुर, बरेली, मथुरा, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, हरदोई, बस्ती, सुल्तानपुर, अमेठी, गोरखपुर, मऊ, वाराणसी, प्रयागराज जैसे कई जिलों की 19 जानी-मानी और मध्यम आकार की कंपनियों ने यूपीसीडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इस प्रकार की इकाइयां स्थापित करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है और लगभग रु. 503 करोड़ के प्रस्तावित निवेश के साथ, इन कंपनियों से प्रति दिन 770 टन ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के उत्पादन की उम्मीद है। उनके सकारात्मक अभिरुचियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, ऑक्सीजन की कमी का समाधान प्रदान करने की राह पर है।
वर्तमान में, 7 कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है जबकि 4 अन्य कंपनियों ने भूमि चिन्हित कर ली है और प्राथमिकता पर उन्हें आवंटन के लिए सैद्धांतिक अनुमति भी जारी कर दी गई है और आगे भी उनके आवेदनों को फास्ट ट्रैक पर मंजूरी दी जाएगी। यूपीसीडा इस संबंध में अपनी इकाई स्थापित करने में दिलचस्पी दिखाने वाली बाकी कंपनियों को सारी सहायता प्रदान कर रहा है।
ऑक्सीजन पुनर्जनन और इससे संबद्ध इकाइयों को सुचारू रूप से स्थापित करने और उनके कार्यों को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों में, यूपीसीडा ने नैनी औद्योगिक क्षेत्र में अपनी सरस्वती हाई टेक सिटी में मेसर्स प्रभा इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन को अपनी इकाई लगाने हेतू 4000 वर्गमीटर उपलब्ध कराने की पेशकश की है। मैसर्स प्रभा इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन ने लिक्विड नाइट्रोजन, लिक्विड ऑक्सीजन, इंडस्ट्रियल और मेडिकल ऑक्सीजन बनाने की योजना बनाई है, जो समय की आवश्यकता है। यह रु0 15.76 करोड़ के निवेश के साथ प्रति दिन 1100 से 1500 सिलेंडर की क्षमता पर काम करने की योजना बना रही है। कंपनी ने प्रयागराज में तीन सरकारी अस्पतालों, बेली, डफरिन और कोल्विन को भी अपनाया है और बिना किसी लागत के ऑक्सीजन प्रदान कर रही है।
सीईओ मयूर महेश्वरी ने बताया कि यूपीसीडा ने हरदोई में मेसर्स ट्यूलिप ऑक्सीजन को प्राथमिकता पर 1800 वर्गमीटर भूमि आवंटित की है। इस क्षेत्र में कंपनी का 25 वर्षों का अनुभव है और उनकी योजना, चिकित्सा और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए प्रतिदिन 600-700 ऑक्सीजन सिलेंडर की उत्पादन क्षमता और 500-600 ऑक्सीजन सिलेंडर के रिफिलिंग के साथ रु0 2.83 करोड़ का निवेश करने की है। निर्माण कार्य तुरंत शुरू किए जा रहे हैं और कंपनी को 18 महीनों के भीतर उत्पादन शुरू करने की आशा है।
यूपीसीडा, शाहजहाँपुर औद्योगिक क्षेत्र में कृभको फर्टिलाइज़र्स को उनके 400 वर्गमीटर भूखण्ड पर एक अतिरिक्त इकाई के रूप में 500 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाली पीएसए प्रौद्योगिकी पर आधारित तरल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए प्रेरित करने में सहायक रहा है। तत्काल कार्रवाई करते हुए, कंपनी ने ऐरोक्स नाइजेन इक्विप्मेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है और उनकी रु0 1.0 करोड़ का निवेश करने और 15 दिनों के भीतर उत्पादन शुरू करने की योजना है।
कानपुर में परेरहत गैसेस को यूपीसीडा द्वारा लगभग 1800 वर्गमीटर भूमि आवंटन किया गया है और कंपनी ने इस परियोजना में रु0 5.0 करोड़ निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी ने पहले ही 10 मीट्रिक टन की उत्पादन क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट खरीद लिया है और शीघ्र ही उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है।
सीईओ मयूर महेश्वरी ने बताया कि आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा रायबरेली में अपनी इकाई स्थापित करने और एयर लिक्विड नॉर्थ इंडियन प्राइवेट लिमिटेड से कोसी कोटवान, मथुरा में अपनी इकाई स्थापित करने के लिए प्राप्त परियोजनाओं पर सक्रिय कार्यवाई करते हुए, यूपीसीडा द्वारा भूमि चिन्हित की गई है और सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी गई है। आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पूरे देश में 43 इकाइयों का संचालन और 550 अस्पतालों और 200 रिफाइनरियों के माध्यम से देश में ऑक्सीजन की 60% लगभग मांग को पूरा किया जा रहा है। कंपनी को प्रति दिन 2500-3000 सिलेंडरों की क्षमता वाली लिक्विड ऑक्सीजन और नाइट्रोजन उत्पादन इकाई स्थापित करेगी तथा AIMS, रायबरेली और SGPGI, लखनऊ को ऑक्सीजन की 24X7 आपूर्ति करेगी।
ये इकाइयां राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करेंगी और इस चुनौतीपूर्ण समय में बड़े पैमाने पर चिकित्सा समुदाय और समाज को लाभान्वित करेंगी। स्थापित होने के बाद, यह “ऑक्सीजन ग्रिड” आने वाले वर्षों में स्वस्थ भारत की रीढ़ की हड्डी बनेगा।


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