
लखनऊ, । मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी कार्यभार ग्रहण करने के साथ लगातार एक्शन में दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ उन्होंने जहां औचक निरीक्षण में अधिकारियों-कर्मचारियों के पेंच कसने की शुरूआत की है, वहीं उनके मंत्री भी सरकार के एजण्डे को धरातल पर उतारने में जुट गए हैं। हालांकि इन सबके बावजूद अब सवाल उठ रहे हैं कि अखिलेश यादव सरकार में मलाई काटने वाले अधिकारियों की अहम ओहदों से कब छुट्टी होगी, क्योंकि सूबे में निजाम भले ही बदल गया हो लेकिन पुरानी नौकरशाही अभी भी अपने पदों पर कायम है।
दरअसल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बहुमत में आते ही सचिवालय में फाइलों को फाड़ने की घटना भी चर्चाओं में आयी थी। पूरे पांच साल सपा सरकार की आंखों का तारा बने रहने वाले कई अधिकारी नए बहुमत के बाद सकते में आ गये थे, उन्हें न सिर्फ महत्वपूर्ण पदों से अपनी विदाई होती दिख रही थी, बल्कि भ्रष्टाचार के मामलों मंे अपनी गर्दन फंसने का भी डर था। ऐसे में जब तेजतर्रार छवि वाले मुख्यमंत्री के रूप में आदित्यनाथ योगी के नाम का ऐलान हुआ तो इन वरिष्ठ नौकरशाहों की सांस ही अटक गयी।
हालांकि इसके बावजूद अभी तक सीएम योगी अखिलेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से ही काम ले रहे हैं।
आमतौर पर सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही मुख्य सचिव को हटा दिया जाता है, लेकिन राहुल भटनागर अभी भी अपने इस पद पर कायम हैं। इसी तरह पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद भी पुलिस महकमें के मुखिया बने हुए हैं। नवगठित सरकार ने मलाईदार पदों के साथ अखिलेश सरकार के खास जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों तक को अभी तक नहीं छुआ है। सभी पहले की तरह अपने पदों पर कार्यकरत हैं। आईएएस अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव सदाकान्त, प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पण्डा, प्रमुख सचिव नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव चंचल तिवारी, प्रमुख सचिव संजीव सरन, प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला योगीराज में उसी तरह काम कर रहे हैं, जैसे पहले करते थे। इसी तरह आईपीएस अफसरों में एडीजी लाॅ एण्ड आर्डर दलजीत चैधरी चुनाव के दौरान भले ही भाजपा नेताओं के निशाने पर थे, लेकिन नई सरकार में भी उनका महत्वपूर्ण ओहदा बरकरार है।
इसी तरह सभी आईजी और डीआईजी भी पहले की तरह काम कर हैं। इसके अलावा धर्मेन्द्र सिंह, शलभ माथुर, मंजिल सैनी, नीलाब्जा चैधरी, जे.रविन्द्र गौड़, आकाश कुल्हरी, राजीव मल्होत्रा, अब्दुल हमीद सहित कई आईपीएस अभी भी अपनी-अपनी कुर्सियों में जमे पड़े हैं। हालांकि चुनाव परिणामों के बाद एनेक्सी में पंचम तल में तैनात 07 अधिकारियों को जरूर कार्यमुक्त किया गया। इनमें अनीता सिंह, पार्थसारथी शर्मा, आमोद कुमार, अमित गुप्ता, रिग्जियान सैम्फिल, प्रांजल यादव और नवीन कुमार जी.एस. शामिल थे, लेकिन यह कदम कार्यवाहक सीएम के तौर पर अखिलेश यादव की ओर से लिया गया था। भाजपा के कई नेता-कार्यकताओं ने कहा कि ऐसे में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जब बेहद तेजी से यूपी का विकास करना चाहते हैं, तो अखिलेश की आंखों का तारा रहे ये अधिकारी नई सरकार में भले ही तेजी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक तौर पर इनका मन काम में नहीं लग रहा है। यह अन्दर ही अन्दर मान चुके हैं, कि इन्हें जल्द ही अहम पदों से हटना है। इसलिए असमंजस के दौर यह नौकरशाह पूरी तल्लीनता से काम नहीं कर रहे हैं।
वहीं एक आवाज यह भी उठ रही है कि जिस तरह से नई सरकार ने सपा शासन में हुए भ्रष्टाचार और अहम फैसलों की जांच की बात कही है, वह इन अधिकारियों के रहते कैसे मुमकिन होगा। इन अधिकारियों को जितना ज्यादा वक्त अपनी कुर्सी पर मिलेगा, यह गुनाह के सबूत उतनी तेजी से मिटाते जायेंगे। इसलिए अब इन पर त्वरित एक्शन लेने का वक्त हैं। निचले अधिकारियों पर सख्ती के बजाए अगर वरिष्ठ नौकरशाहों को हटाया जाए, तभी पूरे प्रदेश में शासन-प्रशासन पर सकारात्मक सन्देश जायेगा और अधिकारी नई सरकार की प्राथमिकताओं के हिसाब से काम कर सकेंगे।
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