दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सामने चुनावी चक्रव्यूह को भेदने की कठिन चुनौती है।
चौथी बार विधानसभा चुनावों में अपनी और कांग्रेस की नैया पार लगाने में जुटी शीला के लिए यह चक्रव्यूह विपक्ष के साथ साथ उनके अपने दल के कुछ दिग्गज नेताओं ने तैयार किया है।
इन नेताओं को डर है कि अगर शीला चौथी बार भी दिल्ली जीतने में कामयाब रहीं तो केंद्र की राजनीति में वह तब प्रधानमंत्री पद की बड़ी दावेदार होंगी, जबकि राहुल गांधी खुद को इस दौड़ से बाहर रखेंगे। इसलिए कम से कम आधा दर्जन बड़े कांग्रेस नेता चाहते हैं कि दिल्ली में कांग्रेस तो चुनाव जीत जाए, लेकिन शीला अपनी सीट हार जाएं। इसे भांप कर ही शीला ने आखिरी दो दिन अपना पूरा जोर अपनी सीट पर ही लगाया है।
यह जानकारी देने वाले सूत्रों के मुताबिक इन नेताओं ने अपने खास भरोसेमंद लोगों से अपनी यह इच्छा साझा की है। इनका यह भी कहना है कि इसके बावजूद अगर शीला जीत गईं और दिल्ली में कांग्रेस सरकार बनने की नौबत आई तो यह दबाव बनाया जाएगा कि शीला चौथी बार मुख्यमंत्री न बन सकें।
इन नेताओं में एक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेहद भरोसेमंद हैं, तो दूसरी कांग्रेस की दिग्गज महिला नेता और एक उनके भरोसेमंद केंद्रीय मंत्री हैं। जबकि दो नेता दिल्ली की राजनीति के दिग्गज हैं और पार्टी संगठन में अहम पदों पर हैं।
इनमें एक नेता का भाजपा उम्मीदवार विजेंद्र गुप्ता को अपरोक्ष समर्थन हैं। इनके अलावा दिल्ली की राजनीति के पुराने खिलाड़ी रहे दो और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी इसमें सक्रिय हैं, क्योंकि शीला के दबदबे की वजह से दिल्ली कांग्रेस की सियासत में इनका दबदबा खत्म हो गया है।
इन नेताओं की कोशिश यह भी है कि शीला के अलावा उनके खास सिपहसालारों की भी अगर हार हो जाए तो इसका ठीकरा भी शीला दीक्षित पर फोड़ा जा सकता है।
चुनावों में कांग्रेस की मदद कर रहे एक मुस्लिम सांसद को कांग्रेस के शीला विरोधी नेताओं ने संकेतों में शीला की मदद करने से मना किया। यह अलग बात है कि इसके बावजूद उक्त सांसद ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
नई दिल्ली सीट से शीला के मुकाबले में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और आप पार्टी के शिखर नेता अरविंद केजरीवाल हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दौर का पूरा दारोमदार सड़क, रेडियो, टीवी हर जगह शीला दीक्षित के ही कंधों पर रहा।
जहां पहले यह नारा लगा ‘अनुभव है और रफ्तार है, कांग्रेस फिर इस बार है’, लेकिन आखिरी दो दिनों में दिल्ली की सड़कों पर शीला की बड़ी और सोनिया, मनमोहन और राहुल की छोटी तस्वीरों वाले बड़े होर्डिंगों में नारे को कुछ इस तरह बदल दिया गया ‘अनुभव है रफ्तार है, शीला फिर इस बार है’।
बताया जाता है कि अपने खास रणनीतिकारों से शीला ने कहा कि जीत की गारंटी चाहे जितनी भी हो विरोधी को कभी भी कमजोर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
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