
lucknow | यमुना प्राधिकरण में भी लीजबैक के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। यहां यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे करोड़ों रुपये की जमीन को आबादी के नाम पर छोड़ दिया गया जबकि अभी भी यह जमीन खाली पड़ी है। प्राधिकरण ने अधिग्रहण के बाद लीजबैक के नाम पर करीब 100 एकड़ जमीन को छोड़ी है। यमुना प्राधिकरण में लीजबैक के सभी प्रकरणों की जांच चल रही है। बोर्ड बैठक में सहमति बनने के बाद जांच शुरू कराई गई थी।
जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दनकौर, निलौनी शाहपुर और जगनपुर गांव में यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे करोड़ों की जमीन को आबादी के नाम पर छोड़ा गया है जबकि अभी भी यह जमीन खाली पड़ी है।लीजबैक की चल रही जांच में घोटाले की परत दर परत खुल रही है। निलौनी शाहपुर में लीजबैक के 22 प्रकरणों की जांच चल रही है। इनमें से 16 प्रकरण में बड़ी गड़बड़ी मिली है। नियमों के खिलाफ जाकर इस जमीन को आबादी में दर्ज किया गया है। इसी तरह जगनपुर गांव में लीजबैक के 20 प्रकरण हैं। यहां भी 16 प्रकरण फर्जी मिले हैं। वहीं दनकौर गांव में भी लीजबैक के आठ प्रकरण फर्जी निकले हैं। इन तीनों गांव में ही करीब 100 एकड़ खेती की जमीन को आबादी के नाम पर छोड़ा गया है।
200 से अधिक प्रकरणों की जांच चल रही प्राधिकरण में लीजबैक के 200 से अधिक प्रकरणों की जांच चल रही है। जांच पूरी होने तक लीजबैक पर रोक लगी है। काफी हद तक जांच पूरी हो चुकी है। दिसंबर के आखिरी तक लीजबैक की जांच पूरी हो जाएगी। कैसे हुआ लीजबैक घोटालाप्राधिकरण ने पहले गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया। उस दौरान गांव की आबादी को भी अधिग्रहण में शामिल कर लिया गया।
ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो शासन ने निस्तारण के लिए समिति बना दी। बताया जा रहा है कि जो जमीन आबादी के नाम पर छोड़ी गई है, उस पर समिति की रिपोर्ट आई है तभी उसे अधिग्रहण से बाहर किया गया। समिति में प्रशासन, पुलिस के अलावा प्राधिकरण के अफसर शामिल थे। बताया जा रहा है कि नेताओं और अफसरों की मिलीभगत से यह हुआ है।
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