
प्रदेश में सीएए के विरोध में 20 दिसंबर को हुई हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर आगजनी की गई थी। करोड़ों की सार्वजनिक व निजी संपत्ति को दंगाइयों ने नुकसान पहुंचाया था। प्रदेश सरकार ने इसे लेकर वसूली की प्रक्रिया शुरू की है। इससे हालांकि सीआरपीसी के प्रावधान के तहत किया जा रहा था लेकिन वसूली में कुछ विधिक दिक्कतें आ रही थीं। इस मद्देनज़र सरकार ने दंगे के दौरान हिंसा के आरोपियों के पोस्टर भी लगाए थे जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपत्ति जताते हुए पोस्टर हटाने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ प्रदेश सरकार फिलहाल सुप्रीम कोर्ट गई हुई है।
इसके लिए सरकार ने अब ‘उत्तर प्रदेश रिकवरी फ़ॉर डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट अध्यादेश-2020 लाने का फैसला किया है। चूंकि विधानसभा सत्र अभी नहीं है लिहाजा इसे अध्यादेश के रूप में लाया जा रहा है। बाद में इसे विधेयक के रूप में विधानसभा से पास करवा कर कानून की शक्ल दी जाएगी।
कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि हाईकोर्ट में रिट याचिका 2007 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने विशेष रूप से यह कहा था कि देश में राजनीतिक दलों को अवैध प्रदर्शनों हड़ताल बंद के आह्वान पर सार्वजनिक व निजी संपत्तियों पर उपद्रवियों द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है। इसमें अवैध उपद्रवियों से रिकवरी के लिए संपत्ति के नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। इसी मद्देनज़र कैबिनेट में प्रस्ताव रखा गया जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
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