ठेकेदारों के भरोसे 24 घंटे बिजली आपूर्ति की योजना पर सवालिया निशान


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लखनऊ|  उप्र सरकार द्वारा बजट में बिजली क्षेत्र के लिए आवण्टित की गयी रिकॉर्ड धनराशि का स्वागत करते बिजली इंजीनियरों ने कहा है कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति की योजना को कामयाब बनाने हेतु बजट में कुशल तकनीकी कार्मिकों की भर्ती का कोई प्राविधान न किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि कुशल तकनीकी कार्मिकों का नियोजन किये बिना संविदा मघ्दूरों और ठेकेदारों के भरोसे 24 घंटे बिजली आपूर्ति करना संभव नहीं है ।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे , उप्रराविप अभियंता संघ के अध्यक्ष आर के सिंह एवं महासचिव डी सी दीक्षित ने आज यहां कहा कि अक्टूबर तक शहरों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घन्टे बिजली देने के लिए मैन , मेटेरियल और मशीन तीनों का समन्वय घ्रूरी है जिसमे सबसे महत्वपूर्ण जनशक्ति (मैन ) है जिसके बारे में बजट में कुछ नहीं कहा गया है । उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली के लगभग 1.5 करोघ् उपभोक्ता हैं और अगले एक साल में लगभग एक करोघ् उपभोक्ता और जोघ्ने की योजना है जिसे मात्र 20-25 हघर कार्मिकों के भरोसे पूरा करना संभव नहीं है । उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जब 40 उपभोक्ता थे तब एक लाख कर्मचारी थे जो आज मात्र 20-25 हघर कर्मचारी बचे हैं ।

उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति की योजना को सफल बनाने हेतु बिजली पारेषण व वितरण प्रणाली को सक्षम बनाने के साथ ही राष्ट्रीय मानक के अनुसार उपभोक्ता संख्या के आधार पर कुशल कार्मिक , तकनीकी परिचालकीय कर्मचारी , जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियन्ता से मुख्य अभियंता तक मानव संशाधन का पुनर्योजन करना नितांत आवश्यक है अन्यथा साकार की बजट घोषणाएं दिवा स्वप्न साबित होंगी । उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र , गुजरात , तामिलनाडु और पँजाब आदि प्रांतों में बिजली की बघ्ती मांग और बघ्ते उपभोक्ताओं की अनुरूपता में मानव संशाधन का नियोजन किया गया है जबकि उप्र में बिजली व्यस्था ठेकेदारों के भरोसे छोघ् दी गयी है जिसके दुष्परिणाम सामने हैं ।

उन्होंने कहा कि मजरों के विद्युतीकरण के लिए 11900 करोघ् रु का प्राविधान ठीक है किन्तु भूमिगत केबल के लिए 500 करोघ् रु और निजी नलकूपों के ऊर्जीकरण हेतु 150 करोघ् रु की धनराशि पर्याप्त नहीं है । उन्होंने कहा कि मानव संशाधन के लिए बहुत बघ्ी धनराशि की घ्रुरत नहीं है क्योंकि अधिकाँश कार्मिकों को समयबद्ध वेतन मान के अंतर्गत उच्च पदों का वेतन पहले ही मिल रहा है अतः उच्च स्तर पर नए पदों के सृजन पर बहुत वित्तीय भार नहीं आएगा । वैसे भी जो धनराशि आज ठेकेदारों को दी जा रही है वह नियमित मानव संसाधन के बाद बचेगी और उसका सदुपयोग हो सकेगा ।

उन्होंने कहा कि मैन , मेटेरियल और मशीन का समन्वय सुनिश्चित करने हेतु मुख्यमंत्री को तत्काल कदम उठाना चाहिए अन्यथा बजट की घोषणाएं कागज पर ही रह जाएंगी ।


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