
लखनऊ। राज्य सरकार हाल में भ्रष्टाचार रोकना चाह रही है। निकायों में होने वाले भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त है। राज्य सरकार धांधली रोकने के लाख प्रयास कर ले पर उसके मातहत ही इसमें सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। स्थानीय निकाय निदेशालय ने निकायों में व्याप्त अनियमितताओं पर रोक लगाने व जांच संबंधी सूचनाएं मांगी, लेकिन 653 में 318 निकायों ने इसकी सूचनाएं नहीं दी। स्थानीय निकाय निदेशक अखिलेश सिंह ने इस पर आपत्ति जताई है।
राज्य सरकार निकायों में व्याप्त अनियमितता व भ्रष्टाचार रोकने के लिए नित नए प्रयास कर रही है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए दागियों पर कार्रवाई की जा रही है। निकायों में भी इसे रोकने का प्रयास किया गया और इसके बारे में सूचनाएं मांगी गई, लेकिन निकाय देने को तैयार नहीं हैं। स्थानीय निकाय निदेशक ने नगर आयुक्तों व अधिशासी अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि 18 बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थी, लेकिन इस पर अभी तक सभी निकायों से सूचनाएं नहीं मिली है।
निदेशालय खासकर यह जानकारी चाही है कि निकायों के संचालित स्कूलों में भर्तियों की क्या स्थिति है और छात्र-शिक्षक अनुपात क्या है। इसी तरह चलने वाली योजनाएं, उनके पास वाहनों की संख्या, पांच सालों में विकास प्राधिकरणों से मिली कालोनियों के बारे में जानकारियां मांगी गई हैं। इसके साथ ही 1987 से निकायों में शामिल गांवों की संख्या के बारे में जानकारियां मांगी गई है, लेकिन सभी निकाय इसे देने को तैयार नहीं हैं। निदेशक से निकायों से तीन दिन के अंदर पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा है। इसके बाद भी जानकारी न देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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