नई दिल्ली, संसद सत्र में विपक्ष की संभावित घेराबंदी को देखते हुए भाजपा ने अपने सहयोगी दलों को साधना शुरू कर दिया है। बजट सत्र को लेकर एनडीए नेताओं की सोमवार को हुई बैठक में घटक दलों की नाराजगी दिखी थी। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को सहयोगी दलों के साथ अलग अलग बैठकें शुरू कर दी हैं।
सहयोगी दलों को साधने के क्रम में शाह ने मंगलवार सुबह टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू के साथ बैठक की और शाम को अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात की। भाजपा अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि पंजाब के अगामी विधानसभा चुनावों में दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच साथ चुनाव लड़ने को लेकर उहापोह को समाप्त करते हुए भाजपा और अकाली दल ने गठबंधन पहले की तरह रखने का फैसला किया है।
पंजाब में साथ लड़ेंगे चुनाव: राज्य की 107 सीटों में से भाजपा 23 सीटों पर तो चुनाव लड़ेगी ही। साथ ही तीन और सीटें देने पर अकाली दल विचार करेगा। आगामी राज्यसभा चुनाव में भी उम्मीदवार दोनों दल मिलकर तय करेंगे। सूत्रों के मुताबिक शाह ने सुखबीर बादल को आश्वस्त किया कि भाजपा की तरफ से गठबंधन को लेकर किसी भी तरह की बयानबाजी नहीं होगी। साथ ही उन्होंने बादल को राज्य सरकार की छवि सुधारने को भी कहा है। दोनों नेताओं ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को लेकर भी विचार विमर्श किया है।
रवैये पर उठा था सवाल: सोमवार को एनडीए नेताओं की बैठक में अकाली दल, शिवसेना और टीडीपी ने गठबंधन को लेकर भाजपा पर सवाल खड़े किए थे। इस बैठक में अकाली नेता सुखबीर बादल ने शुरुआत करते हुए कहा था कि जिस तरह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय एनडीए एकटजुट होकर काम करता था और भाजपा जिस तरह की भुमिका निभाती थी वह अब एनडीए में दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने गठबंधन को लेकर भाजपा के प्रदेश नेताओं की बयानबाजी का मुद्दा उठाया था और कहा था कि न तो भजपा नेतृत्व स्थिति साफ कर रहा है और न ही अपने नेताओं को चुप करा रहा है। उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के चलते संसद द्वारा एसजीपीसी एक्ट में किए जाने वाले संसोशन पर भी केंद्र सरकार द्वारा कोई कदम न उठाने का मुद्दा उठाया था।
समन्वय का मुद्दा
बादल को देखकर शिवसेना ने भी सहयोगियों के साथ भाजपा के व्यवहार पर सवाल उठाए थे और कहा था कि वह उन्हें कमजोर करने और उनका कद घटाने में लगह हुई है। टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू ने भी सहयोगी दलों के साथ समन्वय और संवाद न होने का मुद्दा उठाया था और कहा, हमारे सांसदों को पता नहीं होता कि सरकार में क्या हो रहा है। भाजपा को सामूहिक भावना के साथ चलना होगा और सहयोगियों को मजबूत करना होगा।
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