जिन चार राज्यों में कांग्रेस की करारी हार हुई है वहां लोकसभा की कुल 72 सीटें हैं। मोटे तौर पर कांग्रेस कुल 335 सीटों पर सत्ता से बेदखल है। अब ऐसे में कांग्रेस कैसे जीतेगी सत्ता का फाइनल?
अगर 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विधानसभा चुनाव के इन परिणामों की समीक्षा करें तो कांग्रेस के लिए बहुत ही धुंधली तस्वीर नजर आती है।
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली के इन चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। छत्तीसगढ़ में तो कांग्रेस के 27 मौजूदा विधायकों ने अपनी कुर्सी गंवाई है। इन चारों राज्यों में लोकसभा की कुल 72 सीटें दांव पर हैं।
बात करें मध्यप्रदेश की तो यहां कांग्रेस को उम्मीद थी कि वो तीसरी बार बीजेपी का विजयी रथ रोक पाने में कामयाब होगी लेकिन ऐसा हो न सका।
शिवराज सिंह चौहान के करिश्मे से बीजेपी यहां हैट्रिक बनाने में कामयाब हुई। इस हार से मध्यप्रदेश में न केवल कांग्रेस कार्यकर्ता हताश हुए हैं बल्कि लोकसभा चुनाव में भी यहां उसकी संभावनाएं धूमिल हुई हैं।
मोदी को पीएम का उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में पहले ही रणनीतिक बढ़त बना ली है। जबकि कांग्रेस अपने पीएम उम्मीदवार को लेकर अब भी संशय में है।
हालांकि इसका खामियाजा नजर आने के बाद चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संकेत दिए कि वो अपने पीएम पद के उम्मीदवार का ऐलान कर सकती हैं।
मध्यप्रदेश के परिणामों को लोकसभा चुनाव के लिहाज से देखें तो यहां की 29 सीटों पर अब कांग्रेस की संभावनाएं बहुत कम हो गई हैं। केवल कुछ दिग्गज नेताओं को छोड़ दें तो यहां कांग्रेस के लिए बहुत अच्छी संभावनाएं नजर नहीं आती।
बात करें, राजस्थान की तो कांग्रेस को यहां उम्मीद थी कि अशोक गहलोत की कुछ जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उसे मिलेगा लेकिन यहां भी उसे करारी हार का सामना करना पड़ा।
लोकसभा की यहां 25 सीटें हैं और अगर मतदाताओं का यही मूड रहा तो कांग्रेस के लिए बहुत अच्छे आसार नहीं। राजस्थान में न गहलोत का जादू चला और न सोनिया और राहुल की रैलियां ही कोई करिश्मा कर पाईं।
कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह आश्वस्त था कि छत्तीसगढ़ में तो वह सरकार बनाने में कामयाब हो ही जाएगा लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगी।
कांग्रेस ने अपनी छत्तीसगढ़ इकाई को एकजुट कर चुनाव में उतारा तो लेकिन उसके 27 मौजूदा विधायक ही चुनाव हार गए। लोकसभा की 11 सीटों में से य़हां से केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत कांग्रेस के अकेले सांसद हैं और उन्हीं को कमान सौंपकर पार्टी ने उम्मीद लगाई थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
सबसे दिलचस्प रहा दिल्ली का चुनाव। लोकसभा के लिहाज से यहां केवल सात सीटें हैं और यहां पर पार्टी को जो गत हुई है उसको देखकर पार्टी निश्चित तौर पर चिंतित नजर आ रही है।
लोकसभा चुनाव की एक मोटी तस्वीर देखें तो इन चुनाव में मध्यप्रदेश की 29, छत्तीसगढ़ की 11, राजस्थान की 25, दिल्ली की 7, 40 सीटों वाले बिहार2 सीटों वाले गोवा, 26 सीटों वाले गुजरात, उड़ीसा की 21, पंजाब की 13, तमिलनाडु की 39, उत्तरप्रदेश की 80 और 42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल से भी कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर है। कुल मिलाकर 335 सीटों वाले इन राज्यों में पार्टी सत्ता से बाहर तो फिर कैसे पार करेगी 2014 की लोकसभा की डगर?
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