प्रधानमंत्री नोटबंदी के एक वर्ष पीछे का भाजपा सांसदों, विधायकों से ले हिसाब—मायावती


 

 

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जनता की आंखों में धूल झोंकने का मोदी का नया नाटक

लखनऊ,। बहुजन समाम पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश मायावती ने कहा कि अब यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूरी सरकार व भाजपा नोटबन्दी के मामले में, भारी जनदबाव में है, जिस पर से ही, लोगों का ध्यान बाँटने के लिये ही इन्होंने अपना नया शिगूफा छोड़ते हुये अपने सांसदों व विधायकों से नोटबन्दी का 8 नवम्बर से 31 दिसम्बर, 2016 तक का हिसाब-किताब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जमा करने का बयान दिया है।

भाजपा के इस ध्यान बाँटो अभियान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा की यह एक और नाटकबाजी है तथा लोगों की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास है, क्योंकि देश के लोगों में भाजपा के प्रति गोलमाल की जो आशंका उत्पन्न हुई है वह वास्तव में दिनांक 8 नवम्बर को 500 व 1000 रुपये की नोटबन्दी से पहले के दस महीने के दौरान् भाजपा द्वारा अपना अकूत धन देशभर में जमीन व अन्य सम्पत्ति आदि के खरीदने, बैंकों में धन जमा करने आदि को लेकर ख़ासकर है, जिसका सही समाधान किया जाना चाहिये, न कि इधर-उधर की बातों से जनता का ध्यान बांटने का प्रयास करना चाहिये। हालाँकि भाजपा व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार नोटबन्दी के मामले में व्यापक जनसमर्थन का दावा करते हुये नहीं थक रही है, परन्तु इस वास्तविकता को नजरअन्दाज नहीं कर पा रही है कि पूरे देश भर में करोड़ों गऱीब, मजदूर, किसान, व्यापारी, कर्मचारी व आमजनता पिछले 21 दिनों से काफी ज्यादा परेशान हैं और उनकी मुसीबत थोड़ा भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

इसलिए जनता ध्यान बांटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाजपा के सांसदों व विधायकों से नोटबन्दी के बाद के समय का हिसाब-किताब माँगना उतना मायने नहीं रखता है जितना कि दिनांक 8 नवम्बर से पहले के एक वर्ष का भाजपा का अपना हिसाब-किताब व निवेश आदि।


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