
उन्होंने कहा कि इस फेस्टिवल का पहला सत्र युवा वैज्ञानिकों को समर्पित किया गया है। युवावस्था में कोई सपना-जज्बा पकड़ लेंगे तो पूरा जीवन अर्थपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि देश की 65 फीसदी आबादी युवा है। यह मंच वैचारिक विनिमय का माध्यम बने। जिन वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने कुछ खोजा है विज्ञान में मुकाम हासिल किया है, यहां उनकी मौजूदगी भी है और युवा वैज्ञानिकों-शोधार्थियों को सीखने का बेहतर मौका भी है। सीवी रमन के बाद देश को विज्ञान में कोई नोबल नहीं मिला इसलिए यहां से मन में नया विचार, सोच और जज्बा लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के लिए तमाम योजनाएं हैं। पर्याप्त पैसा, स्टार्टअप, स्टैंडअप आदि जैसा मूवमेंट चल रहा है। युवा वैज्ञानिकों को फेलोशिप दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि अगर वैज्ञानिकों ने ठान लिया तो देश ही हर समस्या का समाधान हो सकता है। जैसे कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी होती है उसी तरह साइंटिफिक सोशल रिस्पांसबिलिटी होनी चाहिए। जो शोध हों उसमें यह देखा जाए कि वह आम लोगों के कितने हित में हैं, उनकी कॉस्टिंग कितनी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी कारगर होगी। वैज्ञानिक क्षमता का इस्तेमाल देश हित में हो।
इससे पहले डॉ. मीनाक्षी मुंशी, डॉ. रेनू स्वरूप, डॉ. आशुतोष शर्मा और डॉ. रमेश ने भी यंग साइटिंफिक कांफ्रेंस सत्र के शुभारंभ पर अपने विचार रखे। केंद्रीय मंत्री व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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