यूपीडा व एन.एच.ए.आई.को सड़क निर्माण के लिए खनन क्षेत्र आरक्षित—- राज प्रताप सिंह


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लखनऊ,। प्रदेश के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा यूपीडा और एन.एच.ए.आई. को सड़क निर्माण हेतु बालू, मौरम की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खनन क्षेत्रों को आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। इस व्यवस्था से सड़क निर्माण कार्य हेतु बालू एवं मौरम की दिक्कत इन प्राधिकरणों को नहीं होगी।

भू-तत्व एवं खनिकर्म विभाग के अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह द्वारा इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिया गया है। उन्हेंने कहा कि यूपीडा (उ0प्र0 एक्सप्रेसवेेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण) को हमीरपुर जनपद में सहजना ग्राम में 12.145 हे0, कौशाम्बी में नंदा का पुरवा ग्राम में 24.28 हे0 तथा सोनभद्र में बोधाडीह ग्राम में 6.07 हे0 खनिज क्षेत्र का आवंटन किया गया है। खनन की अवधि हमीरपुर तथा कौशाम्बी में एक-एक वर्ष और सोनभद्र जनपद में 02 वर्ष की होगी। इसी प्रकार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एन.एच.ए.आई.) में बांदा जनपद के ग्राम सदीममदनापुर में 42.49 हे0, हमीरपुर जनपद के ग्राम कलौलीतीर में 16.194 हे0 तथा सोनभद्र जनपद के ग्राम खैबधां में 14.57 हे0 क्षेत्र में खनन का आवंटन किया गया है। खनन की अवधि इन सभी जिलों में 02 वर्ष की होगी। अपर मुख्य सचिव के अनुसार यूपीडा हमीरपुर में 145740 घनमीटर, कौशाम्बी में 360000 घनमीटर एवं सोनभद्र में 121500 घनमीटर बालू मौरम का प्रतिवर्ष खनन करेगी। एन.एच.ए.आई. बांदा में 848800 घनमीटर, हमीरपुर में 194328 घनमीटर एवं सोनभद्र में 291500 घनमीटर क्षेत्र का प्रतिवर्ष खनन कर सकेगा।

उन्होंने बताया कि खनन पट्टा अनुमोदित खनन योजना एवं आवश्यकतानुसार पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के उपरान्त निष्पादित किया जाएगा। खनन योजना तैयार करने का दायित्व पट्टाधारक का होगा। खनन क्षेत्रों से खनिजों की निकासी परिवहन मार्ग के निर्माण की जिम्मेदार भी संबंधित संस्था की होगी। श्री सिंह ने बताया कि नदी तल में अधिकतम तीन मीटर की गहराई अथवा जल स्तर जो भी पहले हो, तक ही खनन कार्य किया जाएगा। बालूध्मोरम की निकासी में सक्शन मशीनध्लिफ्टर मशीनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्हांेने बताया कि पट्टाधारक नियमानुसार देय आयकर विभाग का टी.सी.एस. जिला खनिज विकास निधि एवं जी.एस.टी. आदि देय धनराशि नियमानुसार जमा करना होगा। स्थानीय परिििस्थ्तयों के दृष्टिगत जिलाधिकारी अथवा राज्य सरकार द्वारा यदि कोई अतिरिक्त शर्त लगाई जाती है, तो वह भी क्षेत्र के खनन पट्टे पर प्रभावी होगी।


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