लखनऊ। नव वर्ष के शुभ आगमन के अवसर पर, सपा मुखिया श्री मुलायम सिंह यादव के आवास पर ‘विश्व संस्कृति’ का अनूठा दृश्य देखने को मिला। जहाँ सामाजिक सस्था बी- अवेयर फाउंडेशन की पहल से 11 देशों (ब्राजील, कोस्टारिका, फिनलैण्ड, फ्रांस, इटली, जापान, मैक्सिको, नार्वे, स्वीडन, अमेरिका एवं भारत) के बच्चे उपस्थित थे। इन बच्चों ने एकजुट होकर अपनी कला और संस्कृति को एकता के सूत्र में बांधते हुए ‘विश्व संस्कृति’ की अनूठी झलक प्रस्तुत किये। यह सभी बच्चे सीएमएस की मेजबानी में आयोजित में ‘अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर’ में आये हुए है। बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए श्री मुलायम सिंह यादव व्दारा पांच लाख रूपये तथा बी- अवेयर फाउंडेशन की संरक्षिका श्रीमती अपर्णा व्दारा प्रत्येक बच्चे को थैला (बैग) भी उपहार स्वरुप प्रदान किया गया। इस अवसर पर श्री मुलायम सिंह यादव की धर्म पत्नी श्रीमती साधना यादव , श्री प्रतीक यादव, सीएमएस के संस्थापक सही जगदीश गांधी, मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन व कई गणमान्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री मुलायम सिंह यादव ने नव वर्ष की बधाई देते हुए बच्चों को सम्मानित नागरिक बनने की शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा कि बच्चों ने जो कार्यक्रम प्रस्तुत किया, हमारे हिन्दुस्तान से मिलता जुलता था। इसका मतलब है सभी कार्यक्रम दुनिया में लगभग एक जैसे होते है लेकिन उनके तरीके अलग हो सकते है। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि ये बच्चे अपनी शिक्षा पूरी कर एक बार भारत अवश्य आयेंगे और मुझे पुनः सेवा का अवसर प्रदान करेंगे। वही इस अवसर पर श्री प्रतीक यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को नये साल की हार्दिक बधाई देते हुए श्री जगदीश गांधी का आभार व्यक्त किया और कहाकि इस पहल से विदेषी बच्चे भी हमारी संस्कृति और सभ्यता से रूबरू होगें तथा भारतीय संस्कृति को विदेषों में भी प्रचारित करेंगे, जो हमारे लिए गौरव की बात होगी।
वही कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेविका अपर्णा यादव ने सभी को नये साल की हार्दिक शुभकामना दी और कहाकि आज बहुत प्रसन्नता का दिन है कि विभिन्न धर्म, संस्कृति और सभ्यता के बच्चे एक साथ इस जगह पर उपस्थित होकर विश्व बंधुत्व का संदेश दे रहे है। यही परम्परा हमारे भारतवर्ष में सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कहाकि आज हम जहां पर उपस्थित है इस प्रांगण और घर का भी एक इतिहास है मुझे उम्मीद है कि आप इस घर से, कुछ सीख कर जायेंगे। श्रीमती यादव ने कहा कि आप एक साथ रहकर भारत की सँस्कृति, सभ्यता, खान-पान व रीति-रिवाजों से अवगत होंगे और ‘वसुधैव कुटम्बकम’ की भावना को अवश्य साकार रूप दे देंगे।
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