
पीएम ने कहा यूपी में शुरू हो चुके डिफेंस कॉरिडोर की पूरी ताकत कानपुर को मिलने वाली है। पूरे यूपी में सड़कों, हाईवे, एक्सप्रेस वे, रेलवे, एयर वे का जाल बिछाया जा रहा है। कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी जा चुकी है। जल्द ही कानपुर को जाम की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। अब तक पीएम आवास के अंतर्गत देश में लगभग डेढ़ करोड़ घर बन चुके हैं। इससे पहले की सरकार 25 लाख घर ही बना पायी थी।
पीएम बोले मैं कानपुर की धरती पर एक बात फिर से दोहराना चाहता हूं 2022 में जब भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे तब तक हर एक व्यक्ति के सिर पर छत होगी। धरती पर काम करके दिखाने वाली ये सरकार आपके सामने मौजूद है। मंच से पीएम ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद श्याम बाबू और बड़गाम में शहीद दीपक पाण्डेय को नमन किया।
पीएम ने मंच से ‘शहीदों अमर रहें’ के नारे लगाए। इसके बाद बोले अब लगता है कि भारत में दम है, सेना जो तय करती है उसे करके रहती है। सेना के पराक्रम को नीचा दिखाने का दिन-रात प्रयास किया जा रहा है, ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। पाकिस्तान को जो अच्छा लगे ऐसी बातें हमारे हिंदुस्तान में बैठे लोग कर रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए।
सीएम योगी ने कहा कि अब तक जिन कार्यों को नामुमकिन कह कर देश की जनता को वंचित रखा गया था 2014 के बाद मोदी जी ने उसे मुमकिन बना दिया। क्योंकि मोदी हैं तो सबकुछ मुमकिन है, उन्होंने नामुमकिन को मुमकिन बना दिया। सीएम योगी ने मंच पर लगाए मोदी हैं तो मुमकिन है के नारे।
मंच पर चढ़ते ही डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने जय श्रीराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा प्रयागराज के कुंभ में मोदी जी ने जिस प्रकार से सफाई कर्मचारियों के चरण धुलकर समरसता का संदेश दिया है, उस प्रकार कोई नहीं कर सकता। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के बाद सिर्फ जनता मोदी के साथ रहे बाकी सब एक हो जाएं कोई फर्क नहीं पड़ता।
डिप्टी सीएम बाेले लक्ष्मी जी न हाथ के पंजे पर बैठ कर आती हैं, न सपा की साइकिल पर आती हैं न बसपा के हाथी परआती हैं, लक्ष्मी जी विकासरूपी कमल के फूल पर ही बैठकर आती हैं। उन्होंने इस दौरान 100 में 60 हमारा है बाकी सब बंटवारा है का नारा बुलंद किया।
रैली में मौजूद सांसद मुरली मनोहर जोशी ने कहा भारत की अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास हो रहा है। अर्थव्यवस्था छलांग लगाते-लगाते चीन को पछाड़ने के कगार पर पहुंच गयी है। भारत की सेनाएं सीमा पार कर शत्रुओं से लोहा ले रही हैं। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, क्योंकि इससे पहले की सरकारें नपुंसक थीं।
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