
लखनऊ. समाजवादी पार्टी में जारी विवाद सतह पर पहुंच गया है. बुधवार को इसी सिलसिले में शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की. इस मुलाकात में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भी शामिल होने की उम्मीद थी. हालांकि वह इस मीटिंग में नहीं पहुंचे. यह बैठक करीब ढाई घंटे तक चली.
बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के बुलाए जाने के बाद शिवपाल सिंह यादव अपने बेटे आदित्य यादव के साथ उनके आवास पर उनसे मिलने पहुंचे. यह बैठक करीब ढाई घंटे तक चली. इसके बाद शिवपाल ने कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगे. शिवपाल ने कहा कि इस्तीफा का सवाल नहीं उठता हैं. मैं अभी भी मंत्री हूं और मंत्री रहूंगा. नेताजी ने पार्टी अध्यक्ष बनाया है. मैं इस पद बना रहूंगा और पार्टी के लिए काम करता रहूंगा.
शिवपाल ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री के साथ काम नहीं कर सकता. पूरे राज्य में मेरी बेइज्जती हुई है. शिवपाल ने कहा कि अंसारी भाइयों को पार्टी में लाने के फैसले पर आपकी सहमति थी तो भी सीएम के लोगों ने सिर्फ मुझे जिम्मेदार क्यों ठहराया, लगातार मेरे ऊपर हमला हो रहा है. अखिलेश के आदेशों का पालन करने के बाद भी मुझे विलेन के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है. शिवपाल ने मुलायम से अखिलेश के फैसले लेने के तरीके पर आपत्ति जताई.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव से कई अहम मंत्रालयों का प्रभार छीन लिए जाने के बाद उनके प्रदेश कैबिनेट से इस्तीफा देने की अटकलों के बीच शिवपाल ने बुधवार को सैफई में कहा कि विभाग देना या लेना मुख्यमंत्री का अधिकार होता है और वह मुलायम सिंह यादव के फैसले का पालन करेंगे.
शिवपाल ने कहा, मैं लखनऊ जाऊंगा और पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करूंगा. हम मिलकर चुनाव लडेंगे. शिवपाल के इस्तीफे देने की अटकलों के बीच उनके हजारों समर्थक उनके प्रति एकजुटता दिखाने के लिए सैफई में उनके आवास और पीडब्ल्यूडी अतिथिगृह के बाहर एकत्र हुए.
सपा परिवार में चल रही उठापठक पर अपना पक्ष रखते हुए इशारों ही इशारों में किसी बाहरी व्यक्ति की दखलंदाजी की बात कह गए. क्या यह इशारा अमर सिंह की तरफ था? जब इस बाबत पत्रकारों ने अमर सिंह से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले से जुड़े हुए नहीं हैं, इसलिए कोई कॉमेंट नहीं कर सकते.
स गृहयुद्ध के बीच अमर सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है जिसमें वो जाहिर कर रहे हैं कि वो परिवार के लिए बाहरी नहीं बल्कि बेहद नजदीकी हैं. अमर सिंह ने साफ कहा कि अखिलेश ने मेरा नाम नहीं लिया है. अगर मैं बाहरी व्यक्ति हूं तो उनका विवाह उनके पिता ने नहीं, मैंने करवाया. दिल्ली और लखनऊ में रिसेप्शन मैंने किया. आॅस्ट्रेलिया में पढ़ाने के लिए अखिलेश को मैं ले गया. उस समय मुझे नहीं पता था कि वो एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे. वो अगर मुझे मारेंगे तो मैं पूछूंगा कि बेटा कहीं हाथ में चोट तो नहीं लगी. मैं कुछ नहीं बोलूंगा. अगर मुलायम कुछ कहेंगे तो मैं मानूंगा.
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