डोकलाम विवाद पर सुषमा बोलीं, युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत से निकलेगा समाधान


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नई दिल्ली  | संसद में गुरुवार को विदेश नीति पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने विपक्षी दलों के आरोपों पर जोरदार प्रहार किया। डोकलाम विवाद पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सुषमा ने कहा कि किसी समस्या का समाधान युद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय चर्चा से ही इस मुद्दे का समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि भारत धैर्य और संयम के साथ काम कर रहा है।

सुषमा विपक्षी नेताओं के चीनी राजदूत से मिलने पर भी बरसीं। उन्होंने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘विपक्ष के नेता चीनी राजदूत से क्यों मिले? विपक्ष के नेता को पहले भारत का पक्ष जानना चाहिए था। हमने डोकलाम विवाद पर सबको जानकारी दी थी। अब युद्ध लड़ने का युग बदल गया है। युद्ध के बाद भी बातचीत जरूरी है।’ गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भारत में चीन के राजदूत लू झाओहुई से मिले थे। शुरू में कांग्रेस ने मुलाकात की खबरों से इनकार किया था, लेकिन मीडिया में खबर आने के बाद मुलाकात की पुष्टि की गई थी।

विदेश मंत्री ने कहा कि विपक्ष कहता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अकेले पड़ गया है, लेकिन वे बताएं कि क्या यह सच है? उन्होंने कहा, ‘यह बेबुनियाद बात है। विपक्ष बताए कि किस पड़ोसी देश से भारत का संबंध खराब है। आज अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों के साथ भारत से रिश्ते काफी मजबूत हैं।’

सुषमा ने साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू ने निजी सम्मान कमाया था, जबकि पीएम मोदी ने विदेश में देश का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सीपीएम के सीताराम येचुरी बोल रहे हैं कि भारत अमेरिका का जूनियर पार्टनर बन गया है। यह सही नहीं है। सुषमा ने कहा, ‘मोदी ने पैरिस जलवायु समझौते से अलग नहीं होने की बात कही थी। मोदी ने कहा था कि भारत इस समझौते में रहेगा। मोदी में यह माद्दा है कि कहीं भी खड़े होकर ट्रंप को चुनौती दे सकते हैं। मोदी अब ग्लोबल अजेंडा सेट करने वाले पीएम बन गए हैं।’ सुषमा ने कहा कि पाकिस्तानी अगर आतंकवाद छोड़ दे उसके साथ बातचीत के टेबल पर बैठा जा सकता है।

सुषमा ने कहा कि इजरायल भारत का दोस्त है, लेकिन नई दिल्ली फलस्तीन को भी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा, ‘बतौर विदेश मंत्री मैं फलस्तीन की यात्रा पर गई थी। वहां के नेताओं से मिली थी। जहां तक इजरायल की बात है तो पीएम मोदी दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 25 साल पूरा होने पर वहां गए थे।’


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