
महागठबंधन में शामिल होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने बताया कि वह 2014 में एनडीए में शामिल हुए थे और लोकसभा चुनाव से पहले पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि पढ़ाई, दवाई और कमाई के लिए अब बिहार से बाहर नहीं जाना होगा। लेकिन नौजवान आज भी बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। उनकी कथनी और करनी में बहुत फर्क देखा। सरकार में रहते हुए कई बार मामला उठाया लेकिन उसके बाद उन्होंने मुझे बर्बाद करने की कोशिश की। इतना ही नहीं हमारी सीटें कम की गई।
उधर, राहुल गांधी की तरीफ करते हुए रालोसपा नेता ने कहा कि उन्होंने चुनावी रैलियों में किसानों की कर्ज माफी की बात कही थी और चुनाव खत्म होते ही उनकी सरकारों ने पहला काम किसानों की कर्जमाफी का किया।
कुशवाहा ने एक पत्रकार के सवाल में कहा कि वह लोकसभा चुनाव में कम सीट मिलने की वजह से ही एनडीए से अलग नहीं हुए हैं। बल्कि साजिश के तहत उनकी पार्टी को कमजोर किया जा रहा था क्योंकि वह सोशल जस्टिस के मामले उठाते रहते थे।
तेजस्वी यादव से सर्किट हाउस में मुलाकात पर कुशवाहा ने कहा कि उनसे मुलाकात आकस्मित थी। उन्होंने कि सबको पता है कि शिक्षा मंत्री का क्या काम होता है। टीचरों की बहाली करने में बिहार सरकार नाकाम रही है और केन्द्रीय विद्यालयों में देख लीजिए केन्द्र सरकार ने कितने शिक्षकों की बहाली की है। जब उनसे पूछा गया कि आपको पार्टी में मुख्यमंत्री का उम्मीदवार कहा जाता था तो उन्होंने कहा कि अभी लोकसभा का चुनाव होना है विधानसभा का नहीं तो ये बरसाती सवाल मत पूछिए।
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