दो दिवसीय स्टेट कंसल्टेशन रिवीजन आॅफ यू0पी0 पापुलेटिंग पाॅलिसी वर्कशाप का मुख्य सचिव द्वारा शुभारम्भ
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन ने कहा है कि उ0प्र0 जनसंख्या नीति-2000 की वर्तमान स्थिति और भविष्य को दृष्टिगत रखते हुये चिन्तन करने एवं योजना बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 सरकार द्वारा आम नागरिकों की सुविधा के लिये समाजवादी एम्बुलेंस सेवा आदि योजनाओं का क्रियान्वयन कराकर ग्राम स्तर पर लाभान्वित कराने के सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य वर्ष मनाने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि शिशुओं एवं माताओं को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने हेतु अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जनसंख्या नीति की समीक्षा करते हुये भविष्य की जनसंख्या नीति हेतु ठोस सुझाव आमंत्रित किये जाने की आवश्यकता है।मुख्य सचिव आज यहां होटल ताज में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय स्टेट कंसल्टेशन रिवीजन आॅफ यू0पी0 पापुलेटिंग पाॅलिसी वर्कशाप का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ करने के उपरान्त मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भविष्य की जनसंख्या नीति को तैयार करने हेतु सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री केशव देसीराजू की अध्यक्षता में ड्राफ्टिंग समूह का गठन किया जाना सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि संशोधित जनसंख्या नीति में समुदाय के हाशिये पर रहने वाले और कमजोर वर्गों की महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखना अतिआवश्यक है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास एजेण्डा लागू कर चिन्हित परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से कराकर प्रस्तावित परियोजनाओं को निर्धारित अवधि में गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित कराने के लिये अभियान चलाया जा रहा है।
सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी एवं भारत सरकार के पूर्व सचिव श्री केशव देसीराजू ने अब तक संशोधित जनसंख्या नीति बनाने में सहभागी प्रक्रिया की सराहना करते हुये मार्गदर्शन एवं पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यशाला में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री अरविन्द कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि ‘राज्य द्वारा पूर्व निर्धारित 2011 के स्वास्थ्य सूचकांक की प्राप्ति नहीं की जा सकी, जिसमें मुख्यतः कुल प्रजनन दर में कमी लाना एवं बाल विवाह को रोकना एवं विवाह की सही उम्र एवं गर्भवती माताओं का टीकाकरण आदि में सुधार की आवश्यकता है।
अधिशासी निदेशक सिफ्सा श्री अमित घोष ने बताया कि राज्य स्तरीय कार्यशाला के पूर्व प्रदेश के 75 जनपदों हेतु मण्डलीय जनपद इलाहाबाद, आगरा, गोरखपुर और मुरादाबाद में 04 क्षेत्रीय कार्यशालायें आयोजित की जा चुकी हैं, जिसमें 600 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है।
कार्यशाला में अधिशासी निदेशक पी0एफ0आई0 सुश्री पूनम मुतरेजा, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डाॅ0 विजय लक्ष्मी एवं अन्य विभागों जैसे-पंचायतीराज, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, सामाजिक विकास क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
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