कैंसर का इलाज नमक से होगा


saltनमक का इंजेक्शन कैंसर की कोशिकाओं को समाप्त कर देता है और वह कोशिकाओं को अपने आप ही नष्ट होने में मदद करता है। यह नई खोज कैंसर रोकने की नई दवाओं का आधार बन सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैंप्टन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक खोजी है, जिससे कैंसर की कोशिकाएं अपने आप ही नष्ट हो जाती हैं। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक ऐसा अणु या कण विकसित किया है जो कि बीमारी से प्रभावित कोशिकाओं में सोडियम और क्लोराइड के आयन्स ले जाती है। उम्मीद की जाती है कि इस नई महत्वपूर्ण खोज से नई कैंसर रोधी दवाएं बनाई जा सकेंगी।
डेली मेल ऑनलाइन में लिजी पैरी लिखती हैं कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक पैदा की है, जिससे कैंसर सेल अपने आप नष्ट हो जाएंगी और इसके लिए उनमें नमक का इंजेक्शन लगाना होगा। इससे पहले सिंथेटिक आइन ट्रांसपोर्ट्‍स पैदा किए गए हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि एक कोशिका में नमक के भीतर जाने से कोशिकाओं की मौत हो जाती है।
जर्नल नेचर केमिस्ट्री में इन सिंथेटिक आइन ट्रांसपोर्ट्‍स के बारे में इस सप्ताह बताया गया है, जिससे न केवल बीमारों के लिए नई कैंसर रोधी दवाइयां बनाई जा सकती हैं वरन सिस्टिक फाइब्रोसिस से भी मरीजों को लाभ मिल सकता है।
इस अध्ययन के सह लेखक प्रोफेसर फिलिप गेल का कहना है कि इससे पता लगता है कि कैसे हम नमक की मदद से को‍शिकाओं की मौत की एक प्रक्रिया शुरू करते हैं, जिससे क्षतिग्रस्त या खतरनाक कोशिकाओं से छुटकारा पाया जा सकता है। कैंसर की कोशिकाओं को समाप्त करने का यह एक तरीका है कि आप कोशिकाओं के आयन संतुलन को बदल दें और कोशिकाओं की अपने आप होने वाली मौत की प्रक्रिया को शुरू कर दें। विदित हो कि जब एक कोशिका कैंसरग्रस्त हो जाती है तो इसके कोशिकाओं की झिल्ली के आरपार आइन ले जाने का तरीका बदल जाता है।
मानव शरीर में कोशिकाएं अपनी झिल्ली में आयन्स की एक स्थि‍र सघनता को बनाए रखने के लिए लगातार काम करती हैं। जब उनका यह नाजुक संतुलन बिगड़ जाता है तो वह ऐसी प्रक्रिया अपना लेती हैं, जिसके अंतर्गत क्षतिग्रस्त या खतरनाक कोशिकाओं की अपने आप मौत हो जाती है।
कैंसर से क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने आयन्स को ले जाने का एक कृत्रिम तरीका खोज निकाला है, लेकिन इससे स्वस्थ कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में कॉलेज ऑफ नेचुरल साइंसेज, ऑस्टिन के प्रोफेसर जोनाथन सेसलर का कहना है कि यह उत्साहजनक बात है कि क्योंकि यह कैंसररोधी दवाओं के विकास के लिए एक नया रास्ता दिखाती है।


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